जैसा दुसरो से चाहते हो ऐसा करे सबसे बर्ताव दुसरो से अगर अपनत्व चाहिए स्वयं भी अपनत्व अपनाना होगा जैसा कर्म किया वैसा ही भरना होगा फल को लेकर क्यों है तनाव ख़ुशी चाहिए तो खुशिया बांटो समाज को टुकड़ो में न बांटो एकता का मार्ग ही अच्छा विकारमुक्त जीवन […]

एक सहेली ने फोन उठाया, अपनी दूसरी सहेली को फोन लगाया, बोली,”बहन तुमने टीका लगवाया, अगर लगवाया तो क्या असर पाया”। दूसरी सहेली तपाक से बोली, “मैंने अपने ही नहीं, अपने पति को भी टीका लगवाया, जिसका बहुत भयंकर असर पाया”। पहले तो उनसे लडने मे मेरा पांच मिनिट मे […]

हे मां तुम कहां हो मातृ दिवस भी कब का बीत गया कब तक रूठी रहोगी अब आ भी जाओ तेरी गोद मे सिर रखने से मिट जाती है मेरी सारी थकान मिल जाता है मुझे एक ऊंचा मुकाम, सुना है जो एक बार चले गए लौट कर नही आते […]

सच को सच अब लिख नहीं पाती कलम सिस्टम के आगे आखिर कब तक गिड़गिड़ायेगी कलम तलवार की धार सा जो लिखे कलम तो टूटकर भी अमर हो जाएगी कलम दुनिया की किसी भी कीमत पर न बिचे कलम तो सदियों तक सूरज सी तपती रहेगी कलम सच को सच […]

यू जिंदगी की उलझनों में हम उलझते चले गये। न जीने की चाह है और न मरने का डर। यू जिंदगी की उलझनों में हम उलझते चले गये।। घर से निकले थे हम तो खुशियों की तलाश में..२। गम राह में खड़े थे वो ही साथ हो लिए..२। यू जिंदगी […]

मातृ दिवस पर विशेष रचना मां बच्चे की पहली शिक्षक है,जो सबको पढ़ाती है। उसकी अपनी वर्णमाला है,जो सबको सिखाती है।। मां खुद गीले मे सोकर,तुम्हे सूखे मे हमेशा सुलाती है। मां खुद न खाकर,तुम्हे पहले ही भोजन कराती है।। मां ही तुम्हे लोरी सुनाकर,थपकी देकर भी सुलाती है। जब […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।