विश्व हिन्दी दिवस विशेष “माँ भारती के भाल का शृंगार है हिंदी हिंदोस्ताँ के बाग़ की बहार है हिंदी” हिंदी भाषा के बारे में कवि ने उपर्युक्त पंक्तियों में सटीक ही कहा है कि हिंदी हमारी भारत माता के मस्तक पर शृंगार की तरह सुशोभित होती है। हमारे देश की […]

मनोज कुमार यह उत्सव है एक बूंद स्याही का.यह उत्सव है लोकतंत्र को समृद्ध और सशक्त बनाने का. यह उत्सव है एक पारदर्शी और जिम्मेदार सरकार के चयन का. यह उत्सव है एक आम आदमी के अधिकार का उपयोग करने का. यह उत्सव है एक बूंद स्याही अंगुली में टपका […]

भाषा एक ऐसा माध्यम है, जो समाज के हर वर्ग को आपस में जोड़ कर रखती है। यह युवा पीढी और समाज के अनुभवी एवं वरिष्ठ नागरिकों के मध्य संपर्क और संवाद का अभिन्न सत्रोत है। हर वर्ग की अपनी सोच ,अपने पहलू भिन्न हो सकते हैं, फिर भी संवाद […]

भारतीय बाल साहित्य में वर्षों से ’चंदा मामा’ को इसी विशेषण के साथ हम सब ने प्रेम से मामा का स्थान दिया है। इसी रिश्ते को बलवती बनाते हुए सैंकड़ो कविताएँ रची गईं। कभी पूर्णिमा से अमावस की ओर जाते मामा को रूठते हुए मामा कहा गया तो कभी तिथि […]

● डॉ. पदमा सिंह, इंदौर हमारी आस्था के प्रतीक और धर्म के आधार हैं, हमारे ग्रंथों में वर्णित पौराणिक पात्र। इतिहास, वेद, पुराण और अर्ष ग्रंथ सिर्फ़ मनोरंजक कथा कहानियाँ कहने के लिए नहीं गढ़े गए हैं। हमारे ज्ञान–विज्ञान का रहस्य इन्ही ग्रंथों में समाहित है। विदेशी आक्रांताओं द्वारा भारतीय […]

हिंदी लेख माला के अंतर्गत डॉ. वेदप्रताप वैदिक डॉ. वेदप्रताप वैदिक जहाँ तक राष्ट्रीय मीडिया की लोकप्रियता का सवाल है, यह कहना कठिन है कि उसके प्रति आम लोगों का प्रेम या आदर बढ़ा है लेकिन उसके दर्शकों और पाठकों की संख्या तो काफ़ी बढ़ी ही है। जब आज से […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।