सर्पदंश को तात्कालिक समस्या मानना बेईमानी है,यह दीर्घकालिक भीषण आपदा है। चपेट में आए दिन सैकड़ों लोग असमय काल के गाल में समा जाते हैं। खासतौर पर बारिश और खेती-किसानी के समय सर्पदंश की अप्रिय घटनाएं ज्यादा बढ़ती है। ऐसे मौसम में एहतियात बरतने की खासी जरूरत है। वीभत्स,सर्पदंश से […]

हम मानसिक रूप से आज भी गुलाम हैं और इस गुलामी को बनाए रखने में हमारी असफल शिक्षा व्यवस्था की भूमिका अहम है। वास्तविक रूप से शिक्षित हुए बिना ही महाविद्यालयों -विश्वविद्यालयों से उपाधियां मिल जाती हैं और येन-केन प्रकारेण उच्च पद या उच्च सफलता को हथियाने में सफलता भी […]

एक पक्षी होता है जिसे बुंदेलखंड में ‘किलकिला’ कहा जाता है। किलकिला सदैव नदी की धार के ऊपर बीच में उड़ता है। वो उड़ते हुए ही नदी में रहने वाली मछलियों को देख लेता है, ये मछलियाँ उसका भोजन होती हैं। उसे जब भी भूख लगती है, वह तीर के […]

एक पहल करनी होगी गौरेया को बचाने के लिए,क्योंकि गौरेया कम देखने को मिलती है। यह आए दिन विलुप्त होती जा रही है। सर्वप्रथम हमें बाग-बगीचों को बढ़ाना होगा,पीपल,आम और बरगद के पेड़ लगाने होंगे तथा विलुप्त हो रही इस पक्षी की नस्ल को बचाने के लिए एकसाथ कार्य करना […]

नन्हीं-सी प्यारी-सी, नादान होती है, बेटियां तो माँ बाप की पहचान होती है। न हो बेटी तो वंश न हो वीरान हो घर, घर में रौनक और उजाला लाती हर पहर। सिर को गर्व से ऊँचा करती है , बेटियां तो माँ बाप की पहचान होती है। एक रुन्द आहट […]

न समुन्दर की गहराई का कभी डर होना चाहिए, न आराम करने के लिए कभी घर होना चाहिए। यदि पाना है तुम्हें सूरज की ऊँचाईयों-सी सफलता, तो बाप की ऊँगली पकड़कर सफर होना चाहिए। ——-#सुरेन्द्र ठाकुर ‘अज्ञानी’                           […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।