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कागजों के ढेर लग गए हैं, स्याह हरफ़ों से रंगे कागज के। कागज भी हो गए अब काले, स्त्री पीड़ा की दास्तान कहते। चहुंओर घूम रहे हवस के भेड़िए, नारी की आबरु को लूटने। क्या अर्थ स्त्री सशक्तिकरण का, स्वतंत्रता दफन है कानूनी पन्नों में। पीड़िता मजबूर झूठे गवाहदारों से, […]

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पिछले चार दशक से इंग्लैंड में बसे हुए भूपेंद्र मामाजी जो मूलतः बनारस के हैं,हर नाते-रिश्तेदार की शादियों में शरीक हुए हैं। हर रस्मों-रिवाज़ों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है और वर- वधू को पांच-छह सौ पौंड का चेक देकर गए हैं जो रुपए में बदलकर नवीन जोड़ी के लिए एक […]

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साधारण-सी हँसी, दिल को सुकून.. दे जाती है। प्यारी-सी माँ हमें, लाखों खुशियां दे जाती है। कुछ अनकही-सी बातें, जो और कोई न सुने.. वो मेरी माँ कहलाए।                                             […]

दिखावे की होड़ भी, लगती मृगतृष्णा-सी .. जब पैसों के पीछे, भागता है इंसान| समय और पैसा, जैसे रिश्तों से ज्यादा.. अहमियत रखता हो, तभी दौड़ -भाग के खेल में हो जाते हैं रिश्ते कमजोर| और तो और, दिखावे की होड़ में.. उड़ने पर जल जाते, उम्र के पँख | शायद, […]

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नफ़रतों के अँधियारे को, आज हमें मिटाना है ।   नेकियों की राहों पर , प्रेम-दीप जलाना है ।।   भुलाकर रंजिशें यहाँ , सबको गले लगाना है ।   प्यार के पैग़ाम को , दुनिया में फैलाना है ।।                     […]

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स्नेह की धारा है वह, है वात्सल्य की मूर्ति , वीरुध वही,वन वही, कालिका की वो पूर्ति | राष्ट्र,समाज और परिवार को वो समर्पित, स्व पर,हित को करती प्राण भी अर्पित | वाणी वही,गिरिजा वही,है दामिनी भी वह, कल्पना वो,प्रतिभा वही है,कामिनी भी वह| किरण है वह,है सुभद्रा,है महादेवी भी […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।