फागुन अब मुझे नहीं रिझाता है, जबसे शब्द कोषों में.. प्यार की परिभाषा बदल गई। जबसे रंग भूल गए अपनी असलियत, जबसे तुम्हारी मुस्कान कुटिल हो गई.. जबसे प्यार के खनकते स्वर कर्कश हो गए, तबसे फागुन अब मुझे नहीं रिझाता है। जबसे रिश्तों में पैबंद लगने लगे, जबसे प्रेम […]

बासंती मधुमास प्यार को, ऐसो नशा चढ़ायो री.. फूल-फूल पर कली-कली, इतरायो मंडरायो री। धरती से अंबर तक देखो, आया मौसम प्यार का.. हर कोई अपनी राधा संग, प्रेम ही पींग बढ़ायो री.. बांसती मधुमास प्यार………..। अंखियन में अंखियाँ डालकर, नाच रहे कन्हाई रे.. सुन बंसी धुन,जाग उठी, राधा मन […]

होली में होली जले,उड़ता रंग गुलाल, होली की शुभकामना,मन का मिटे मलाल। मन का मिटे मलाल,न कोई हो घोटाला, फैला दो संदेश,न पीनी है मधुशाला। कह नीरज कविराय,खुशी घर-घर की डोली, मद्यपान को छोड़ मनाओ घर घर होली।                         […]

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गर चली जाए मेरी जान वतन पर, तो इतना-सा काम करना.. दे देना मेरी चिता को मुखाग्नि, न मेरे मातपिता को परेशान करना। जानता हूँ रोएंगें वो बहुत, इसीलिए तुम थोडा-सा उनका ध्यान करना.. गर न मानें फिर भी वो तो, भगतसिंह-चंद्रशेखर की ख्याति का बखान करना। बता देना उन्हें […]

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देखो कैसे रुठ गया है ये दर्पण ? हाथ से कैसे छूट गया है ये दर्पण | प्रतिबिम्बों की चाह न करना अब इससे, नीचे गिरकर टूट गया है ये दर्पण | आंखों में बरसा सावन था दर्पण, गंगा की लहरों-सा पावन था दर्पण | मैं कहता हूँ तुम भी […]

आओ दहन करें इस होली, ‘मैं’ का..अहम्,वहम का। रिश्ते नाते,फिर रंग डालें, यही सही समय,जीवन का। आओ दहन करें,इस होली, ‘मैं’ का..अहम, वहम का। डाह होड़ को,छोड़ करें, साधन ह्रदय,मिलन का। आओ दहन करें,इस होली, ‘मैं’ का..अहम, वहम का। लाल हरा,पीला सब ले लें, हर रंग हम जीवन का। आओ […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।