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ओछे मन के, लोग होते ओछे ही बड़े न होते। दौड़ते लोग, शुगर से लाचार संयम नहीं। मुखौटे लगा, छुपाते हैं चेहरे सच्चे बनते। चैन हराम, दौड़ें जीवन भर धनी बनते। सुनें गालियाँ, लाचार मज़बूर नन्हें बालक। कटते पेड़, लाचार पंछियों का नहीं ठिकाना। मन लालची, थी रिश्वत खाई जेल […]

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जीवन भर, करती रही माँ बस इंतज़ार….. मेरे आने की आहट, महसूस की जब कोख में बिना जाने भी मुझे मेरे जन्म लेने का… करती रही माँ बस इंतज़ार……। गोदी में उसकी जब अठखेलियाँ करते दिन भर उलझाया उसे थकी हारी,मेरे सो जाने का… करती रही माँ बस इंतज़ार…..। नटखट […]

भारत मेरा न्यारा है, ये प्राणों से भी प्यारा है.. तन मन धन मैं तो, यहीं वार जाऊंगा। भिड़े जो भी दुशमन, देशी या विदेशी जन.. कविता की मार दूंगा, शब्द धार लाऊंगा। स्वर्ण चिड़ी का बसेरा, विश्व गुरु देश मेरा.. मैं रक्षा की खातिर, आकाश पार जाउंगा। संस्कृति है […]

उस दिन शर्मा जी के यहाँ बहुत चहल-पहल थी। ऊपर वाले गेस्ट रूम की सफाई हो रही थी। दीवारों पर कौन -सा रंग लगाया जाए,इस बात पर बहस हो रही थी और हो भी क्यों न, तीन साल बाद उनका बेटा सिद्धान्त जो आ रहा था जर्मनी से।मिसेज शर्मा ने […]

प्रियतम अपनी प्रेम कहानी, लगती है कोई प्रीत पुरानी। जनम-जनम की चाहत अपनी, मैं हूँ तेरी प्रेम दिवानी। तू मेरे मैं तेरे दिल में, मिलकर हमने प्रीत निभानी। संग में साजन तुम जो रहते, लगती फिर है शाम सुहानी। भूलूँ चाहे सारे जहाँ को, नही तुम्हारी प्रीत भुलानी। हँसते-हँसते जीवन […]

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हाथ से छूकर, महसूस किया.. कितना खुरदुरापन है, इन हाथों में। वो नजाकतें वो कोमलता, ना जाने कहां खो गई.. मां सिर्फ फौलाद बन कर रह गई। याद है मुझे, वो नाजों-सी कंचन काया.. जो छूते ही मैली होती थी मां कह लिपट जाता था.. पर वो प्रफुल्लित रहती थी। […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।