लफ्ज़ हैं आज गुमशुदा, एहसास हो गए हैं अब तन्हा.. दिल की सच्चाई कितना भी चाहे बेपनाह, पर खा रही है मात हर लम्हा.. हर जगह। वक़्त बदल-सा जा रहा है, शख्सियत भी अब तो जुदा है.. न जाने कहाँ सब खो गया, जज़्बातों का कारवां छूट गया है। अफ़साने […]

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दिलों को झकझोर दे,वो कहानी चाहिए, देश के काम आ सके वो,जवानी चाहिए। यूँ तो हर शख्स जताता है राष्ट्र भक्ति,प्रेम, कर्तव्य निष्ठा से निभाएं, वो ज़िंदगानी चाहिए। खो रहा है बचपन अब बस्तों के बोझ तले, अब हमें वही बचपन-सी नादानी चाहिए। दिल मायूस, उदासियों का लगता है मेला, […]

अहसास करा दूँ क्या उनको, नानी याद दिला दूँ क्या उनको। समंदर से मोती ढूंढकर दिखा दूँ क्या उनको, हार को जीत में बदलकर दिखा दूँ क्या उनको। प्यार में उनके एक और ताजमहल बनाकर दिखा दूँ क्या उनको, कितना प्यार है उनसे,सीना चीर दिखा दूँ क्या उनको। उनके वगैर […]

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असीम सुख मिल जाता, जो पूर्वजों से प्राप्त संस्कारों में, किशोर पीढ़ी खोज रही उसे.. क्लब,कोठी और कारों में। ‘चाव’ पैदा हो रहा है, उच्च ब्रांड की चीजों में.. मूक स्पर्धा पनप रही है, भाई और भतीजों में। (हौंडा सिटी है किसी की, तो दूसरे को ऑडी चाहिए) प्रतिदिन बढ़ता […]

भय के बादल छँट जाने दो, प्रेम की अब बात हो। अलविदा कहो आतंकी रात को, एक नया प्रभात हो। गोली चली,खून बहा.. ज़मीं भी लाल हो गई। हर चप्पा खामोश हुआ, हर गली वीरान हुई। फिर से गूँजे पूजा के सुर, प्रेम की अज़ान हो। अलविदा कहो आतंकी रात […]

जब शाम का सूरज, टाँक रहा होता है पश्चिम में चित्र खूब धूसर, चटक लाल रंग से.. जब धूप थके पाँव लौटने लगती है घर को, तब आकाश थोड़ा नरम होकर फैला लेता है अपनी बाँहें। तब धुंधलका उसकी बाँहों से छूटकर, फैल जाता है पूरी धरती पर, तब हवा […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।