यह लेख स्वतंत्र लेखन श्रेणी का लेख है। इस लेख में प्रयुक्त सामग्री, जैसे कि तथ्य, आँकड़े, विचार, चित्र आदि का, संपूर्ण उत्तरदायित्व इस लेख के लेखक / लेखकों का है, मातृभाषा.कॉम का नहीं। अधूरा नर,वैसे बिन नारी। सूना घर ज्यों,बिन फुलवारी ।। न हो अधम तू,बस मिथ्या में। क्यों […]

यह लेख स्वतंत्र लेखन श्रेणी का लेख है। इस लेख में प्रयुक्त सामग्री, जैसे कि तथ्य, आँकड़े, विचार, चित्र आदि का, संपूर्ण उत्तरदायित्व इस लेख के लेखक / लेखकों का है, मातृभाषा.कॉम का नहीं। काव्य भाषा में होते,वैसे तो कई रस। कानों में मिश्री घोले,क्यूँ ये निन्दा रस।। निंदक नियरे […]

घर छोड़ आई बाबुल का,जो गैरों के वास्ते। मन से जिसने अपनाया,पिया के सब रास्ते।। अज़नबी थे उनसे सब,नाते जोड़ रही है। अपनों का संग प्यारी,बिटिया छोड़ रही है।। नया घर नयी माँ,देवर,ननद,ससुर रूप में बापू को पाया। क्या हम सबने उसे भी, बेटी सा अपनाया। वो नन्ही चिड़िया,पुराना घरोंदा […]

#शशांक दुबे क़लम में धार वही है,पर जज़्बात बदल गये। इतना सहा ज़माने को,हालात बदल गये। लहज़ा वही है बातों का,अल्फ़ाज़ बदल गये। मधुर है गीत उसी तरह,बस साज़ बदल गये। कोई कहाँ रहा युगों तलक,तख्तोंताज़ बदल गये। चंद टुकड़ों के ख़ातिर,मोहताज़ बदल गये। कल कुछ और ही थे,तुम आज […]

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दिल से जो आवाज़ निकलती,वही कहता हूँ। कोरे कागज़ पर स्याह रंग से,कुछ लिखता हूँ। मैं हूँ एक छोटा सा दीपक,रवि नहीं हूँ सच बताऊँ मैं कोई,कवि नहीं हूँ।। जीवन के मकड़जाल में,उलझा रहता हूँ। अनुभव के शब्दजाल,बुनता रहता हूँ। मैं हूँ साधारण सा,बड़ी छबि नहीं हूँ। सच बताऊँ मैं […]

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ग़ज़ल: मृदुल जोशी तुम थोड़े-से हिन्दू बन जाओ, मैं कुछ मुसलमां बन जाता हूँ, तुम मंदिर में अज़ान देना, मैं मस्जिद में पूजा कर आता हूँ| न परेशां हो क़ि, मेरा भगवान और तेरा खुदा क्या सोचेगा, बस एक पल ठहर जा, क़ुरान में वेद-पुराण रख आता हूँ | मैं […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।