चंचल चित्त,चितेरा होना चाहता है, मन मस्त,मगन मुग्ध होना चाहता है। फ़ितरत फ़िसलने की है इस दिल की, बावरा बस बरबस,बहकना चाहता है। दिल हरदम सच्चा होना चाहता है, फिर एक बार बच्चा होना चाहता है। ऊपर से कितना भी शरीफ़ जान पड़े, अंतर्मन से बस चहकना चाहता है। बंद […]

जिंदगी में कुछ तो तेरे साए नजर आएँगे, ठुकराकर भी तुझे ये ‘इरादे’ नजर आएँगे। अपना क्या है यहां इस दर्दे दिल के वास्ते, तन्हा रातों में हमें ये ‘सितारे’ नजर आएँगे। सोचा था इश्क में जिंदगी ये हसीन होगी, भुलाने वालों को ये ‘बहाने’ नजर आएँगे। खुदा की खुदाई […]

माँ के आंचल में लेकर किलकारी, बोलना सीखते अपनी मातृभाषा। जिसमें बुने जाते हैं मीठे-मीठे रिश्ते, पाकर जिसे पूरी हो हर अभिलाषा। बरगद-सी,अमराई-सी है मातृभाषा, फैली है हमारे अंदर इसकी आभा। समाज,परिवार,देश की मजबूती, गठबंधन बनाए रखती है मातृभाषा। बहुत दुखती है,हिन्दी की अंतरात्मा, जब हम शान से बोलते अंग्रेजी […]

न अब एक भी लम्हा खारा करेंगे, हम आँसू भी मीठे बहाया करेंगे । वहीं तक ये रस्ते मेरे नाम हैं बस , कि जुगनू,जहाँ तक उजाला करेंगे । ये सोचा है अब मैकदे छोड़कर हम, तुम्हारे तसव्वुर में बहका करेंगे । मुकद्दर से लेकर इजाज़त ही अब, नया कोई रिश्ता हम बनाया करेंगे । इन […]

1

आज फिर दिल ने एक नगमा गाया है, मुद्दतों बाद कोई हमें याद आया है। उन पुराने पन्नों से धूल सारी उड़-सी गई, सूखी स्याही ने भी कुछ लिखना चाहा है। बुझे चिरागों से रोशनी-सी आई है, खिजा के फूलों ने फिज़ा महकाई है। दिल-ए-तन्हा आज फिर मुस्कुराया है, मुद्दतों बाद कोई हमें याद आया है। आज रंगे शमा खिला-खिला-सा है, अंदाजे शोर कुछ महफिल-सा है। प्यासे प्यालों ने जी भर के ज़ाम पाया है, मुद्दतों बाद कोई हमें याद आया है।                           […]

पर्वत की चोटी पर जाकर, नाकाम होकर लौट आना.. दर्द की दवा ही दर्द का, हर बार बन जाना। कोई क्या देगा तुमको ख़ुशी, जब मुकद्दर में हो.. हर वक्त ही लिखा, ग़मों का बोझ उठाना। ईमानदारी का वजूद खुद, अंधकार में हो जब.. क्या रोशन करेगा किसी का, राहों […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।