कवि होना नहीं है साधारण अपेक्षित हैं उसमें असाधारण विशेषताएं मात्र कवि होना ही बहुत बड़ी बात है लेकिन फिर भी आत्मश्लाघा के मारे लगते हैं नवाजने खुद को ही राष्ट्रीय कवि वरिष्ठ साहित्यकार के खिताबों से नाम के आगे-पीछे लगा लेते हैं ऐसे उपनाम जिन पर स्वयं नहीं उतरते […]

बहुत कठिन है वास्‍तविक होना कठिन ही नहीं असंभव है वास्‍तविक होना वास्‍तविक हम या तो बचपन में होते हैं या अपने जीवनसाथी के पास होते हैं असल में जीवनसाथी के पास भी वास्‍तविक होने में बहुत से पहलू रह जाते हैं अपने बच्चों व माता-पिता के समक्ष पूरी तरह […]

वो उसे कहते हैं घर मात्र दीवार और छत ही हैं फिर भी उसे कहते हैं घर पिता है निठल्ला शराबी माता है करती मजदूरी बच्चे हैं बालमजदूर चूहे भी हैं आवाज की तलाश में फिर भी उसे कहते हैं घर #विनोद सिल्ला   जीवन परिचय   विनोद सिल्ला  माता […]

भाषा जीव के मानव बनने की दिशा में प्रथम कदम कहा जा सकता है। आरंभ में संकेतों की भाषा रही होगी जो कालांतर में शब्द संवाद में परिवर्तित हुई। हर परिस्थिति परिवेश एक दूसरे से अपरिचित और भिन्न था इसलिए हर मानव समूह ने अपने ढ़ंग से कुछ शब्द संकेत […]

नई दिल्ली | विश्व हिन्दू परिषद ने मांग की है कि पाकिस्तान द्वारा पीड़ित हिन्दुओं के धार्मिक, सामाजिक व मानवाधिकारों की रक्षा के साथ उन्हें भारत में नागरिक अधिकार दिए जाएं. परिषद् के केन्द्रीय मंत्री (विदेश विभाग) श्री प्रशांत हरतालकर ने एक प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए यह आज भी […]

एक क्‍यारी में अनेक हैं पेड़-पौधे अलग-अलग हैं जिनकी नस्‍ल अलग-अलग हैं गुण अलग-अलग हैं रंग-रूप फिर भी नहीं करते नफरत एक-दूसरे से नहीं है इनमें भेदभाव की भावना नहीं मानते किसी को छोटा या बड़ा नहीं है इनमें रंग-भेद हवा की धुन पर थिरकते हैं सब एक लय में […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।