ज़ुल्फ़ों को चेहरे पे कितना बेशरम रखते हैं ज़माना अच्छा हो फिर ये भी भरम रखते हैं  ये बारिश छू के उनको उड़ न जाए तो कैसे बदन में तपिश और साँसों को गरम रखते हैं  कमर जैसे पिसा की मीनार,निगाहें जुम्बिश अपनी हर इक अदा में कितने हरम रखते हैं  उनको पढ़ […]

खुद को सबसे दूर किया है उसने जब से मुझे मंजूर किया है उसने इश्क़ की राह इतनी आसान नहीं करके, जुर्म जरूर किया है उसने आँखें दरिया, लब समंदर हो गए हुश्न को ऐसे बेनूर किया है उसने खुद का अक्स साफ दिखता नहीं खुद को चकानाचूर किया है […]

मुझे भुला दिया तो रात भर जागते क्यूँ हो मेरे सपनों में दबे फिर पाँव भागते क्यूँ हो एक जो कीमती चीज़ थी वो भी खो दी अब बेवजह इस कदर दुआ माँगते क्यूँ हो इतना ही आसान था तो पहले बिछड़ जाते वक़्त की दीवार पे गुज़रे लम्हात टाँगते […]

भीड़ से डरता हूँ , और भीड़ से शिकायत है मुझे शुरू से अंत तक अकेले चलने की आदत है मुझे कोई रहबर,कोई रहगुज़र की कोई चाहत ही नहीं टूटते और बनते हुए रिश्तों से कुछ राहत है मुझे ख़ुशी अकेले कोई देता नहीं ,ग़म साथ में आता है सरे […]

मेरी अच्छाई ही मुसीबत है मेरी जहर पीने की बुरी आदत है मेरी मेरी आहों को अहसास बना लेता किसी खुदा की अब चाहत है मुझे दुश्मनों को साथ लिए फिरते हैं आले दर्जे की मोहब्बत है मेरी जो मिलता है, अपना लगता है फरिश्तों की ही सोहबत है मेरी […]

सब हादसे दिन में मुक़म्मल होते नहीं कभी रात को देर तलक भी जागा करो सपने कैसे नेस्तोनाबूत होते हैं हर कदम कभी नंगे पाँव नींदों में भी भागा करो हर शय दूर से खूबसूरत दिखती है जरूर सच के वास्ते चाँद को ज़मीं पे भी उतारा करो दिन में […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।