अपनी ही धुन में मगन देखते हैं फैशन का इस तरह चलन देखते हैं मर्यादा रखी गई ताक पर अधनंगा बदन देखते हैं लोग अपने आप मे सिमटने लगे खो रहा अपनापन देखते हैं रिश्तों में हो रही खटास जुबान पे कड़वापन देखते हैं तालुक कौन रखता है झोपड़े वालों […]

हम खुशी के खुमार में रहते हैं हर पल तुम्हारे इंतजार में रहते हैं गज़ल कभी शायरी जिंदगी हमारी खोए हुए इक तुम्हारे प्यार में रहते हैं झूठ हमारी फितरत में बिल्कुल नहीं हम है कि,सच्चे किरदार में रहते हैं नेता नहीं ना अभिनेता कोई हम फिर भी चर्चे हमारे […]

चलो कुछ पहल करते हैं हसीन कुछ पल करते हैं साथ तुम्हारा हमारा रहे मुश्किलें बड़ी,हल करते हैं हाथ एकदूजे का बटाकर खड़ा कोई महल करते हैं जिंदगी में कुछ उबासी सी है चलो कुछ बदल करते हैं यू गुमसुम होना ठीक नहीं मन अपना जरा चंचल करते हैं लबों […]

भा गया मुझको वो लुभाना तेरा दूर जाना कभी पास आना तेरा गजब की वो सारी मस्ती तेरी नजरें मिलाना और चुराना तेरा पागल ही किया तेरे अंदाज ने तेरी अदा और मुस्कुराना तेरा बिखरी सी लटें माथे की बिंदिया होश मेरे उड़ाए सीने से लगाना तेरा शोखी वो शरारत […]

सूख गई धरती आसमां उदास है प्यासे  हुए  मानव  लगी  प्यास है क्यों ये अब सारे जंगल कट गए है सुकून भी नहीं गर्मी का अहसास है नम हो गई है आँखे मनुहर दृश्य नहीं आलम ये देख लो खो गया मधुमास है बूंद बूंद पानी को तरस रहा ये […]

छोड़ो भी सियासत की बातें करते   रहो चाहत  की  बातें साथी सभी को अपना बना लो करो भी जरा इबादत की बातें गद्दार मुल्क को खोखला कर रहे करो तुम जरा हिफाजत की बातें हिंदु, मुसलमान हैं आखिर  इंसान करना नहीं कभी अदावत की बातें बुजुर्गों से भला  कैसी  नाराजगी […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।