ये कैसा जमाना आया है हर जगह छल-प्रपंच और माया है देखने में तो सुन्दर काया है अन्दर प्रेत की छाया है भादों मास में भी धूल जमा है हर घर में गमले में फूल लगा है पेड़ों का कोई निशान नहीं है शायद कोई अब इंसान नहीं है प्रकृति […]

  पांव के बिरोध में जूतों ने कर दी है बगावत नहीं रहेंगे अब वो पांव में बदल लिये हैं अपनी भूमिका अब जूते निशाना बना रहे हैं तानाशाहों को गिर रहे धड़ा-धड़ जूते सिर पे तानाशाहों के कह रहे हैं जूते इन तानाशाहों से बचो यदि बच सकते हो […]

उस समय कहा था नेता जी ने अंग्रेजों से भारत को वापस लेंगे तुम हमें खून दो ! हम तुम्हें आजादी देंगे जय हिन्द बोलो !जय हिन्द अबके लोग कह रहे… तुम लोगों ने चुना है हमें हम तुम्हारे विचारों से ही चलेंगे लेकिन जीतने के बाद तुम हमें आजादी […]

छुट्टी के दिन छुट्टी जैसे नहीं होते उसी दिन कमबख्त सब काम होते छुट्टी के दिन ही मुहल्ले में आते हैं मलाई वाले, फेरीवाले, कबाड़ी वाले उनकी आवाज से ही टूटती है टूटे फूटे सामानों की भी नींद संगी साथी भी आते हैं मिलने पर होते वो भी जल्दी में […]

खतरे के निशान से ऊपर तुम आ चुकी वह नदी हो कठिन है बचना मेरा शायद बह जाऊंगा तेरे साथ उस किनारे ही मेरी जमीन थी छोटा था सपनों का घर तिनका तिनका जतन कर लिखा था लहू से उस पर सिर्फ तुम्हारा ही नाम पता था मुझे किनारा नदी […]

जिनके मन में पंख और पैर  में पहिये उनके सिर पर भार  और  तेज रफ्तार जीवन में भागम- भाग एवं  अंधी दौड़ उनमें गहमा- गहमी और  वाद -विवाद जहां गर्म हो बाजार  लोग  रहें  बेजार मन  है उचंगा  बह रही उल्टी  ही गंगा बदल गयी रीत अब झूठी है  सब […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।