हमने तो सुखे हुए समंदर देखे हैं क्या क्या खौफनाक मंज़र देखे हैं । ठूठें दरख्तों पर उजड़े हुए घोसलें इन्क़लाब करते हुए बन्दर देखे हैं । मखमली बिस्तर पे बेचैन अमीर और फक्कड़ मस्त कलंदर देखे हैं । फ़र्श से अर्श,ज़र्रे से आफताब बन मिट्टी में मिलते हुए धुरंधर […]

मेरी उम्मीदों पर खरा उतरेगा न ? मुझसे बिछड़ कर तू बिखरेगा न ? जुदा हो कर मरना जरूरी नहीं है मगर जिंदा रहना तुझे अखरेगा न ? न याद करना कभी,न आसूँ बहाना हाँ,पर चाँद रात को आहें भरेगा न ? कोई इल्जाम तुझ पर न आने दूँगा तू […]

जीवी हैं बुद्धि नहीं, कहलाते बुद्धिजीवी हैं। सेवा वो किये नहीं, कहलाते समाजसेवी हैं।। कार्य करते नहीं वो,कार्यकर्ता कहलाते हैं। निधि अपना भरते,प्रतिनिधि  कहलाते हैं।। गणमान्य हैं सबके,मान्य वो गण रखते हैं। अपने साथ सूई नहीं, कैंची जरुर रखते हैं।। अनपढ़ नेता बनते,पढ़कर नौकरी करते हैं। आईएएस उनके ही,ले फाइल […]

खुद ही छपवा कर खुद बेच रहे हैं कर हम सहित्य की देख रेख रहे हैं । फेसबुक,व्हाट्सप ट्वीटर के जरिए महफ़िलें और मुशायरे में पेश रहे हैं । एक से बढ़ कर हैं यहाँ मंच उप्लब्ध ओपेन माईक पर रोटियाँ सेंक रहे हैं । साझा संकलन,काव्य संग्रह के नाम […]

रोजमर्रा की जद्दो-जहद में परेशान रहने दे रहम कर रहनुमाओं मुझे बस इन्सान रहने दे । ये हिन्दू,ये मुसलमां,ये सिक्ख और ये ईसाई मजहबी नाम पर ये वोटों की दुकान रहने दे । कब तक बेचेगा ज़मीर जम्हुरियत के बहाने चैनो-अमन अहले वतन हिन्दूस्तान रहने दे । महफूज़ रहते हैं […]

हमसे हमारे ख्वाब न छिन काँटों भरी गुलाब न छिन । जिंदा तो हूँ गफलत में सही यादों की ये सैलाब न छिन । बेहद सुकून से रहते हैं यहाँ सुखे फूलों से किताब न छिन । कुछ तो रहम कर मेरे खुदा मेरे हिस्से की अज़ाब न छिन । […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।