ज़ख्म अपने दिल पे बेशुमार खा गया, मैं आदमी पहचानने में मार खा गया, ========================== चला था भरोसे का कारोबार करने मैं, जिसपे किया भरोसा कारोबार खा गया, ========================== बच्चे मेरे इक शाम को तरसते ही रहे, दफ्तर मेरा सारे मेरे इतवार खा गया, ========================== नींद नहीं आती मुझको रात-रात […]

यक-ब-यक चल पड़ी हवा जैसे पूरी हो गई हर दुआ जैसे ===================== तुमको देखा तो यूँ महसूस हुआ सामने आ गया खुदा जैसे ===================== मैंने हर बार तुझे यूँ माँगा बच्चा कोई माँगे खिलौना जैसे ===================== इस तरह तूने भुलाया मुझको तू मेरा कभी न था जैसे ===================== ज़िक्र तेरा […]

न कर बर्बाद अपना वक्त ए दीवाने जा नसीब अपना कहीं और आज़माने जा ======================== तेरे अपनों को तो फुर्सत नहीं है सुनने की किस्से अपने अब तू गैरों को सुनाने जा ======================== पहले से ताल्लुकात न रहे हों अब मगर मिज़ाज़ पूछने की रस्म तो निभाने जा ======================== नाकामयाब […]

जो हल न हो सके उन चंद सवालों जैसी ज़िंदगी होती है शतरंज की चालों जैसी ========================== ये तो खुदगर्ज़ी की स्याही पुत गई वरना रंगत अपनी थी बचपन में उजालों जैसी ========================== वक्त कटता ही नहीं मेरा जब तू साथ न हो एक दिन की भी जुदाई लगे सालों […]

चाह है तेरे लिए कोई गीत गाऊँ शब्दों से पाषाण में स्पंदन जगाऊँ मौन के भी कंठ में जो स्वर जगा दे अद्भुत, आलौकिक सुर कोई ऐसा सजाऊँ भूमि के उर तप्त को कर दे जो शीतल व्योम की किसी अप्सरा की भाँति चंचल धवल, पावन चंद्रिका सा रूप अतुलित […]

रश्मि-रथ की करके सवारी तुम आईं हिय-द्वार सुकुमारी श्वासों के आरोह-अवरोह से आहट होती प्रतिध्वनित तुम्हारी अथाह व्योम-से उर में जैसे दिव्य नूपुर खनक रहे हैं इस मादकता की धारा में सारे सुर-नर भटक रहे हैं प्रत्येक सुमन से तेरी ही प्रतिबिंबित होती है छवि न्यारी श्वासों के आरोह-अवरोह से […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।