“तुमको कुछ नहीं होगा… तुम सुरक्षित हाथों में हो।” अटपटी सी अंग्रेजी में कहा था उसने। होश में आने के बाद मंजीत ने खुद को किसी अस्पताल में पाया। जिस्म से कई मशीनें जुड़ी थीं और वो भी…. किसी जरूरी मीटिंग के लिए दिल्ली आया था। प्रेजेंटेशन के दौरान उसे […]

दीप जला अर्चन करू, मन में पूजा भाव । नव दिन का नवरात्रि है, मइया देती छाव ॥1॥ माता के दरबार में, भक्तों का भरमार । पूजन वंदन कर रहे, माँ का बारम्बार ॥2॥ थाल सजा पूजन किया, नव दुर्गा का आज । भक्त सभी दर्शन किये, पूर्ण हुआ सब […]

सेवा शिष्टाचार ही, मानव की पहचान । जन प्रत्येक इसी लिए, दिख रहे परेशान । दिख रहे परेशान,आचरण अच्छा रखना । किये नहीं सत्कार, कहेंगे कैसे अपना । ‘रीत’‘कहे यह बात,मिलेगाकैसे मेवा । अच्छे रखो विचार, करो तुम सबकी सेवा ॥1॥ पक्षी सब आजाद हैं, नभ के छूते छोर । […]

‘दुखिया”तू गमों की मारी,दुखियारी, बेचारी.. ये मार्मिक नामकरण????? नहीं!नहीं! अब सुलझ चुके समीकरण।। नारी नहीं बेचारी।।। न ही दुखों की मारी।। ये अबला,अब बन चुकी “सबला” पुरजोर हौसला कर रहा,लाचारी का नाश, आज की नारी ,छू रही आकाश।।। गगन हो या धरती “विवशता” अब, नारी के समक्ष, पानी है भरती।।।। […]

भारत के हो लाल तुम्हारा अभिनंदन ! किया जो तुमने कमाल तुम्हारा अभिनंदन ! देश के नौनिहाल तुम्हारा अभिनंदन ! अरि को मार गिराय तुम्हें करते वंदन ! बनकरखड़े मिशालतुम्हारा अभिनंदन ! देश खुशी के साथ करे तुम्हरा अर्चन ! दुश्मन को दिये मात तुम्हारा अभिनंदन ! मस्तक तिलक लगाओं […]

दीपक से हमने सीखा, जलना क्या होता है । तिल-तिल जल-जल करके, ऐसे मरना क्या होता है । दीपक सबको देती उजाला, खुद अधियारों में रहकर । सीख लो उससे जीना तुम भी, दुःख सहना होता है क्या ? विरह व्यथा होती बड़ी दारूढ़, सहनाही पड़ता है । अपनों के […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।