आओ! दुनियावालों कुछ हम भी आज बच्चों से सीख लें। मिठास मुस्कान से विभोर कर दें हर शत्रु को, बंदूक उठाने की बजाए फूल हाथों में लेकर स्वागत की जयमाला पहनाएँ। ताकि हर कोई समझें हम स्वस्थ मष्तिष्क के जीव श्रेष्ठ मानव है। एक-दूसरे के बैर भाव मिटाकर दुनिया को […]

“पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी” द्वारा आयोजित “राष्ट्रीय हिंदी विकास सम्मेलन ,2017, 26 , 27, और 28 मई को लेखन मिलन शिविर में मुझे पहली बार शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था । मेघालय राज्य के इतने करीब असम राज्य का निवासी होकर भी मुझे मालूम नहीं था कि हर साल […]

अब चारों ओर महक रहा है आया रंगीन बसंत बसंती तगर फूल खुश्बू हवा संग गगन चूम रहा बरदैचिला बावली सी उड़ कर महकाती गई बिखेरकर नव सुगंध पतझर के बाद डालियों पर बसंत की हरियाली गुलमोहर भी खिलकर मुस्कुराने लगी लेकर बैशाखी की स्नेह भरी मादकता । गा रही […]

     पृथ्वी की प्राचीनतम् महिमा के साथ रहने वाले भारतवर्ष की जाति-जनजाति के वैशिष्ट्य, विभाग और संख्या को लेकर महान पण्डितों के बीच में मतभेद परिलक्षित होता है। संस्कृत साहित्य में निषाद, शवर, पुलिन्द, भिल्ल और कोल्ल इत्यादी नाम से अष्ट्रिक गोष्ठीय जनजाति के उल्लेख हैंं । आर्य लोगों […]

       भारत में जब शरद ॠतु का आगमन होता है तब मौसम सुहावना हो जाता है । इस समय ना तो ज्यादा गर्मी और ना ही ठंड होती है । वर्षा ऋतु में बारिश धरा को धोकर साफ कर देती है, इसलिए शरद में धरा साफ होती है […]

हम गर्व महसूस  करते हैं मीठी है हमारी बोली हम हैं हिन्दुस्तानी । अंग्रेजों ने हमें गुलाम बनाया फिर भी हमने अंग्रेज़ी भाषा को अपनाया । अंग्रेज़ी जब बोलते हैं हम स्मार्ट हो जाते हैं । ये सोच अब बदलनी चाहिए हिन्दुस्तानी भाषा को दिल से अपनाना है। हम हैं  […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।