ये है वर्तमान परिवेश, ये है वर्तमान परिवेश।। दम तोड़ती है इन्सानियत,इन्सान बचा है शेष कोई है अधकचरा शिक्षक, नेतागीरी करता गपशप छोटी सी भी गलती पाकर, शिक्षक पीटे थपथप थपथप बच्चा जो स्कूल को जाये, देता है शिक्षक को गाली जब घरवाले ये सुनते है, देते शाबासी और ताली […]

ऐ दोस्त तेरी दोस्ती में सब छुपाता आ गया मेरे लिए दुश्वारियां परेशानियां साजिश किये वो कुछ भी ना कर पायेगा मैं फिर बताता आ गया। साजिश करे मैं जाउं फंस दुख हो उसे मुझे देख हस वो चाहता है द्वन्द हो आंखों में कुहरे का धुन्ध हो पर सत्य […]

हमने तो सुखे हुए समंदर देखे हैं क्या क्या खौफनाक मंज़र देखे हैं । ठूठें दरख्तों पर उजड़े हुए घोसलें इन्क़लाब करते हुए बन्दर देखे हैं । मखमली बिस्तर पे बेचैन अमीर और फक्कड़ मस्त कलंदर देखे हैं । फ़र्श से अर्श,ज़र्रे से आफताब बन मिट्टी में मिलते हुए धुरंधर […]

  उत्थान देख गांव की आँखें ये भर गई। हालात देख गांव की आँखें ये भर गई। नाली, खड़ंजे छोड़ो सब वो टूटे फूटे हैं दालान देख मुखिया की आँखें ये भर गई। महिला को चुना मुखिया था इस भोली जनता ने देखा पति -परधान तो आँखें ये भर गई। भीतर वो अपने बंगले […]

मेरी उम्मीदों पर खरा उतरेगा न ? मुझसे बिछड़ कर तू बिखरेगा न ? जुदा हो कर मरना जरूरी नहीं है मगर जिंदा रहना तुझे अखरेगा न ? न याद करना कभी,न आसूँ बहाना हाँ,पर चाँद रात को आहें भरेगा न ? कोई इल्जाम तुझ पर न आने दूँगा तू […]

प्यार,मोहब्बत वाले रिश्ते, आओ मिलके निभाये हम साथ मे होली,दीवाली और आओ ईद मनाये हम।। नफरत वाली राहें छोड़ो,प्यार मोहब्बत से सब जोड़ो राह गुनाहों का जो भी हो,उससे अपना नाता तोड़ो बैर भाव सब भूल छोड़ कर,सबको गले लगाये हम साथ मे होली,दीवाली और आओ ईद मनाये हम।। आसमान […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।