दोस्तो हमशक़्ल होना दुनिया के अजूबो में शुमार होता है कि एक जैसी शक्ल के दो इंसान हो, यह उनवान(विषय)बेहद दिलचस्प (रोचक)होने के साथ परिस्थिति जन्य हास्य(सिचुएशल)कॉमेडी बनाने का शानदार मसाला हो जाता है, सिनेमा ने इस विषय की रोचकता को समझते हुवे अपने अविकसित काल से ही इस विषय […]

सलाम करते हैं हम, उन वीर जवानों को। जिनकी दम पर हम, घरों में आराम करते हैं। और वो देते हैं पहरा, सीमा पर खड़े होकर। उन्ही की दम पर हम, अमन चैन से रहते हैं।। उन्हें क्या मिलता हैं, देश सेवा करने से। किसने उनसे पूछा, कभी उनकी मर्जी […]

सुंदर काया सौभ्य छवि ज्ञानवान, वाकपटुता तेजस्वी थी राजनीति में कुशल थी वो प्रखर वक्ता ओजस्वी थी प्यारी सी मधुर मुस्कान थी उनकी मुखर व्यक्तित्व, सुलझी हुई नारी थी सादा जीवन उच्च विचार थे उनके भारत की बेटी संस्कारी थी भारत माता की सच्ची सेवा कर देश में किये सदा […]

रक्षाबंधन का एक ही है विकल्प। बहन की रक्षा का भाई ले संकल्प।। यह राखी बहन ले भाई से वादा। हर नारी के प्रति हो नेक इरादा।। माता-पिता की सेवा मे भाई दे योगदान। तो बहन करे सास-ससुर का सम्मान।। यह त्यौहार बहन ले तोहफा विशेष। भाई से वचन ले […]

सुख दुःख जीवन के दो पहिए रहिए दोनो में एक समान सूर्योदय सूर्यास्त के समय जैसे सूरज रहता एक समान जब उगता है तब अंहकार नही जब ढलता है तब मलाल नही शांत सौम्य रहता दोनो समय प्रचण्डता में भी नही अभिमान सूर्य ने सिर्फ देना ही सीखा कभी किसी […]

आधी रात बीत चुकी थी रेलगाड़ी धड़धड़ाती तीव्रगति से दौड़ रही थी सन्त रामहरे खड़े-खड़े काफी थक चुके उनके पैर भी जवाब दे चुके थे परन्तु सीट तो छोडिये जमीन भी तिलभर खाली नहीं थी भारतीय रेल के सामान्य डिब्बे का सफर किसी जंग जीतने से कम नहीं होता और […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।