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प्राकृतिक सौंदर्य और मनुष्य का बढ़ता फासला…

हमारे आस-पास सब कुछ प्रकृति है,जो बहुत खूबसूरत पर्यावरण से घिरी हुई है। हम हर पल इसे देख सकते हैं और इसका आनंद उठा सकते हैं। हम हर जगह इसमें…
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आलोचना

रेखा

जाने कौन-सा धन मुझमें देखा! जाने क्यूँ मुझसे रुठ गई गरीबी रेखा।। लाख चाहा मैंने इसके नीचे आऊँ, इसके कदमों तले बिछ जाऊँ और पा जाऊँ छोटा कूपन, अब नहीं…
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