उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के वर्ष २०१७ के घोषित पुरस्कारों में समकालीन ग़ज़ल के सशक्त हस्ताक्षर अभिनव अरुण को उनके ग़ज़ल संग्रह ‘’बादल बंद लिफ़ाफ़े हैं ‘’ के लिए प्रतिष्ठित ‘’दुष्यंत कुमार पुरस्कार’’ प्रदान किया किया गया है | आगामी १४ अक्टूबर २०१८ को आयोजित समारोह में पुरस्कार स्वरूप प्रमाण […]

पुस्तक समीक्षा पुस्तक – वाजपेयी – एक राजनेता के अज्ञात पहलू लेखक – उल्लेख एन.पी अनुवाद – महेंद्र नारायण सिंह यादव कीमत – रू. 350मात्र प्रकाशक – मंजुल पब्लिशिंग हाउस ‘भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय प्रधानमंत्रियों में से एक पर रोचक पुस्तक’ – इस पुस्तक के विषय में वॉल्टर ऐंडरसन ने […]

मालवी काव्य संग्रह “म्हारा भागीरथ  का भई “रचनाकार गौरीशंकर उपाध्याय “उदय “३० मालवी रचनाओं का संग्रह मन में भी मिठास घोलडेता है | मालवी बोली की तासीर का असर है | मीठी बोली ऐसी की मानों शहद घुली हो | बोलियों को बचाने में ये अंक महत्व पूर्ण भूमिका अदा […]

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पुस्तक परिचय …………….. पुस्तक का नाम : उठने लगे सवाल विधा : दोहा लेखक : राजपाल सिंह गुलिया प्रकाशक : अयन प्रकाशन 1/20, महरौली, नई दिल्ली – 110030 प्रथम संस्करण : 2018 पृष्ठ संख्या : 96 मूल्य : 200 रुपये श्री राजपाल सिंह गुलिया का दोहा संग्रह “उठने लगे सवाल” […]

      साहित्य समाज का दर्पण है यह तो हमें अभी कहना नहीं पड़ेगा । साहित्य जाति धर्म का वाहक है । साहित्य के बिना हम किसी जाति संस्कृति अथवा धर्म को समझ नहीं पायेंगे ।      महान हिंदी साहित्यकार माननीय मुंशी प्रेमचंद जी के कहना है “जिस […]

ये दिन कर्फ्यू के हैं काव्य-संग्रह : स्वाति श्वेता संस्करण : प्रथम 2018 प्रकाशक : भारत पुस्तक भंडार, दिल्ली पृष्ठ संख्या : 100 मूल्य : 250 /- रुपए *********************** संवेदनशील कवियित्री स्वाति श्वेता जी का सद्य प्रकाशित प्रथम काव्य संग्रह जिसमें आपने अपने आसपास नज़र आ रही संवेदन शून्यता को […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।