Archives for लघुकथा - Page 2

Uncategorized

चकाचौंध महानगर की

चार दिन हो गये लेकिन उस कमरे का दरवाजा नहीं खुला, ना कोई गया। मुहल्ले में सिर्फ और सिर्फ़ यही चर्चा तमाम थी। हर शख्स किसी अनहोनी को सोच ससंकीत…
Continue Reading
Uncategorized

सुहागन

“यह तुम्हारा रोज़-रोज़ का तमाशा हो गया है। दो दिन आती हो और चार दिन छुट्टी मारती हो...कभी लड़की बीमार है, कभी लड़का और कभी खुद। काम में मन लगता…
Continue Reading
Uncategorized

कौन कौन कौन जात?

आज दिन भर आराम करना है।। शिमला की सड़कों पर घूमते रहे। आज सूट बूट भी थोड़े अच्छे वाले पहने है।आज कोई नही कह सकता कि ये पाँचों ईंट रेत…
Continue Reading
Uncategorized

दुरुपयोग

एक बूढ़ा आदमी जिसने सिर्फ धोती पहनी हुई थी, धीरे-धीरे चलता हुआ, महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास पहुंचा। वहां उसने अपनी धोती में बंधा हुआ एक सिक्का निकाला, और…
Continue Reading
Uncategorized

आत्मसंतुष्टि 

शिखर शुरू से ही बहुत ही प्रतिभाशाली था l वह बचपन में  गाँव के ही स्कूल में पढ़ता था l उसके शिक्षक उसके कार्यों से सदैव प्रसन्न रहते थे l…
Continue Reading

मातृभाषा को पसंद कर शेयर कर सकते है