रश्मिरथी डॉ.कविता ‘किरण’: मरुधर की माटी से काव्य धरती के शृंगार तक डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ छुपके सिरहाने में रोते हैं लोग दीवाने क्यों होते हैं हर गहरी साजिश के पीछे दोस्त पुराने क्यों होते हैं बन गये दिल पर बोझ जो ऐसे साथ निभाने क्यों होते हैं हर युग […]

रश्मिरथी राहुल व्यास:  ग्रामीण परिवेश से काव्य मंचों के गौरव तक  डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ मौत अटल है…. आ तू, ऐसे क्यों खड़ी है, जिया हूं ज़िन्दगी तो मौत भी एक घड़ी है । शाश्वत है सब कुछ तो भी अंजाम जटिल है, इंतजार सबकुछ नहीं होता, मौत अटल है । अब तो […]

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रश्मिरथी अमन अक्षर: रत्नगर्भा मध्यप्रदेश का नव काव्य प्रकाश डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ देह बनवास को सौप कर वो चला चित घर की दिशा, शेष जाने किधर। १३ जून १९९० को निमाड़ की धरती पर खंडवा के पास ग्राम मुंदी में जन्मे और वर्तमान में इंदौर में रहने वाले अमन जिन्होंने बी टेक  […]

रश्मिरथी अरुण जैमिनी:  हास्य के रंग में साहित्य की किलकारी  डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ सरकारी कार्यालय में नौकरी मांगने पहुँचा तो अधिकारी ने पूछा “क्या किया है” मैंने कहा- “एम.ए.” वो बोला- “किस में” मैंने गर्व से कहा- “हिन्दी में” उसने नाक सिकोंड़ी “अच्छा… हिन्दी में एम.ए. हो बड़े बेशर्म हो अभी तक […]

रश्मिरथी डॉ कुमार विश्वास : हिन्दी की प्रसिद्धि से दीवानी कविता तक  डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ यशस्वी सूर्य अम्बर चढ़ रहा है, तुमको सूचित हो विजय का रथ सुपथ पर बढ़ रहा है, तुमको सूचित हो अवाचित पत्र मेरे जो नहीं खोले तलक तुमने समूचा विश्व उनको पढ़ रहा है, तुमको सूचित हो […]

रश्मिरथी  शैलेष लोढ़ा : गर्म धरती से हास्य की ठंडक तक  डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ अतीत ने वर्तमान की आंखों में झांका और मुस्कुरा के कहा, जीवन तो मैंने जिया, अब तो सिर्फ दौड़ है जीवन कहाँ रहा ?? नवम्बर ८, १९६९ को जोधपुर की धरती पर पिता श्याम सिंह लोढ़ा और माता […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।