भारत देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है – *हिंदी* और करीब सत्तर प्रतिशत जनता हिंदी भाषा का प्रयोग दैनिक जीवन में करती है। पहले हिंदी के संचार का माध्यम सीमित था अखबार ,रेडियो, टेलीविजन, कंप्यूटर, लेपटॉप तथा इंटरनेट की दुनिया ने तो जैसे एक नई क्रांति ही […]

निज भाषा में ही करें, सभी ज्ञान की बात । देश गौरव बने सभी, यही मिले सौगात ।। हिन्दी भाषा हिन्द की, इसे अमल में लाय। जन-जन तक पहुँचा इसे,अलख जगाया जाय।          हिंदी आज एक ऐसी भाषा है जो दुनिया में इतने बड़े स्तर पर बोली […]

किसी ने सच ही कहा हैं कि “मीडिया ऐसा टकसाल हैं जहां भाषा  गढ़ती यां सृजित होती हैं !”     निःसंदेह आज हिंदी रूपी नन्हा पौधा न केवल भारत देश के कोने कोने में वरन संपूर्ण धरा पर वट वृक्ष की भाँति अपनी जड़ें फैलाकर गहरी पैठ करने में सफल […]

भारत देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है – *हिंदी* और करीब सत्तर प्रतिशत जनता हिंदी भाषा का प्रयोग दैनिक जीवन में करती है। पहले हिंदी के संचार का माध्यम सीमित था अखबार ,रेडियो, टेलीविजन, कंप्यूटर, लेपटॉप तथा इंटरनेट की दुनिया ने तो जैसे एक नई क्रांति ही ला दी […]

1.प्रस्तावना-         अपनी मिट्टी की महक सी होती है अपनी भाषा। हिंदी हमारी मातृभाषा है ,और लिपि देवनागरी है । बेशक हम कितने ही देशों की भाषा सीख ले, परंतु जब तक हम हिंदी ,यानी अपनी भाषा अपनी मातृभाषा को सीखकर निपुर्ण नहीं हो जाते हैं, तब […]

सोशल मीडिया पर साहित्य -लेखन साहित्यकारों के लिए एक सुनहरा मौका है। जिससे कम से कम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों के पास हमारे विचार पहुँच जाते हैं । देश ही नहीं विदेशों में भी बैठे लोग भी साहित्य का आनन्द ले रहे हैं। फेसबुक और साहित्य के ग्रुप […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।