हिन्दू धर्मावलंबियों समेत अन्य धर्मों में भी शायद ही कोई ऐसा मंदिर, मस्जिद या गिरजाघर होगा जो वर्ष में एक दिन के लिए खुलता होगा, लेकिन महाकाल की नगरी उज्जैन में एक दुर्लभ नागचन्द्रेश्वर मंदिर है जो कि प्रसिद्ध महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित है। इसकी खास बात […]

भगवान महाकाल राजा के रूप में प्रजा का हाल-चाल जानने निकलते हैं सावन-भादौ के सोमवार को महाकाल महाराज अपनी प्रजा को दर्शन देने निकलते हैं। शिव को यूं तो घट-घट का वासी कहा गया है, संसार के हर प्राणी में शिव तत्व मौजूद हैं। हर जगह शिव का वास हैं। […]

वैराग्य है राग की विरुद्धार्थी संकल्पना। राग है सांसारिक सुखभोग से जुड़ना, तो वैराग्य है राग से विरत होने, मुक्त होने की अवस्था। यह है सुखभोगों से विरक्ति अर्थात् त्याग का मार्ग, छोड़ने का मार्ग। राग छूट जाए, मोह का बँधन टूट जाए, तो लोभ भी छूट जाए, क्रोध भी […]

कितना कुछ इस पंचम काल या कलयुग में होगा या जो हो रहा है , इसे हमारे भगवान की वाणी मे कहा गया कि पंचम काल या कलयुग मे मनुष्य का विवेक खत्म हो जाएगा। वह पशु जैसी सोच रखेगा। यह बात सचसाबित हो गई है और हम सब जैन […]

      हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार कुल इक्यावन शक्तिपीठ हैं।जिनमें से माता सती की नाभि गिरने के कारण यह स्थान मां पूर्णागिरी के नाम से संसार में प्रसिद्ध हुआ। हिमालयी राज्य उत्तराखंड के चम्पावत जिले में स्थित यह अपार स्नेह का केन्द्र निकटवर्ती शहर टनकपुर से इक्कीस किलोमीटर की […]

पौराणिक कथानुसार अयोध्या के प्रतापी राजा दशरथ की कोई संतान नहीं थी,इसलिए उन्होंने ऋषि वशिष्ठ से संतान प्राप्ति का मार्ग  पुछा।ऋषि वशिष्ठ ने उन्हें संतान प्राप्ति के लिए पुत्र कामेष्टि यज्ञ करवाने को कहा।अतः राजा दशरथ ने महर्षि ऋष्यस्रिंग को यज्ञ करने के लिए आमंत्रित किया। यज्ञ पूरा होने के […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।