Archives for काव्यभाषा - Page 3

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रावण

सदियो से जलाते आ रहे है फिर भी नही जल रहा यह रावण पुतला जलाने से क्या होगा असल मे तो कभी जलाइये रावण रावण तो हम सबके अंदर है…
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दशहरा

हर साल दशहरा मनता है, हर बार रावण यूं ही जलता है,, पूतलों में मरता हर तरफ, मन का रावण मगर कहां दिखता है,, रावण सूचक है बुराई का, हर…
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सही भगवान् को जानो 

फुर्सत नहीं है इंसान को इंसान से मिलने की ! ख्वाहिशे रखता है दूर बैठे भगवान से मिलने की ..! घर में जो भगवान है उन्हें पूजता नहीं ! और…
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संघर्ष

कुछ ऐसा संघर्ष भरा जीवन मिला उसको भाई। प्रयास करे कितने भी पर उसने कभी मंजिल ना पाई।। प्यास लगी है बहुत और उसके हर तरफ पानी है भाई। पर…
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