था अंधेरा घना भयंकर , मगर अब सूरज उगने लगा है,, मेरा अपना सा कश्मीर आज सचमुच अपना लगने लगा है  कश्मीर मेरे देश का मस्तक, तब मुझे एक आंख नहीं भाता था जब लाल चौक पर मेरे देश का तिरंगा नहीं फहराया जाता था एक देश है, एक तिरंगा, […]

देश का नक्शा बदल गया बदल गया स्वर्ग धरा का महामहिम के  एक आदेश से  दम निकल गया 370 का एक राज्य से अब दो हो गए केंद्र सरकार के अधीन हो गए लद्दाख को अपनी पहचान मिली जम्मू कश्मीर  सरकार गिरी भारतीय संसद में गर्जन है पाकिस्तान में भी […]

.                  १  सावन  शृंगारित   करे, वसुधा, नारि, पहाड़। सागर सरिता सत्यशिव,नाग विल्व वन ताड़। .                  २  दादुर  पपिहा मोर पिक, नारी  धरा  किसान। सबकी चाहत नेह जल,सावन सरस सुजान।। .              […]

बेवफाई का शौक उस बेदर्द का, कुछ इस कदर पला था! छोड़कर आया था जिन राहों को, फिर उन्ही पर चला था!! कभी मन भर गया था जिनसे, आज वही  प्यारे हो गए! चुभने लगे थे जो आंखों में, वही आँखों के तारे हो गए!! जिनसे नही मिला सहारा, आज […]

नित्य नियम से मदिरा पान कराये, आजकल तो सच्चा मित्र वही है | दुःख दर्द में जो दारु पिलाये, सच्चा मित्र तो आज वही है | पिला कर जो नाली से निकाले , उस जैसा कोई मित्र नहीं है | मधुशाला का नित्य निमन्त्रण, जो देता है अच्छा मित्र वही […]

विरह रैन यादों में छाओ ! मेरे प्रिय मीत चले आओ !! देता स्पंदन क्षण सूनापन ! बरस रहे नित उर्वर लोचन ! प्राण भरा कोलाहल रूदन ! तामस व्याकुल हुई सुहागन ! मृदुल मकरंद रस बरसाओ ! मेरे प्रिय मीत चले आओ !! चाह यही मिटना है तुझमें ! […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।