हारे के सहारे आ जा, तेरा भक्त पुकारे आ जा। हम तो खड़े तेरे द्वार, सुन ले करुणा की पुकार –२ आओ नाथ पार्श्वनाथ, आओ नाथ पार्श्वनाथ। आओ नाथ पार्श्वनाथ, आओ नाथ पार्श्वनाथ।। कोई सुनता नहीं, अब में क्या करूँ। दर्द दिल की दसा, जाके किस से कहुँ। तेरे होते […]

ज़ुल्फ़ों को चेहरे पे कितना बेशरम रखते हैं ज़माना अच्छा हो फिर ये भी भरम रखते हैं  ये बारिश छू के उनको उड़ न जाए तो कैसे बदन में तपिश और साँसों को गरम रखते हैं  कमर जैसे पिसा की मीनार,निगाहें जुम्बिश अपनी हर इक अदा में कितने हरम रखते हैं  उनको पढ़ […]

बड़ी सी गोल बिंदी,,,  चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान,,,  संसद की  उपमा चली गई,, सादगी और सोम्‍यता की,,,  अद्भुत प्रतिमा चली गई,,, किया काल ने छल तो देखो,,, निश्छल “सुषमा” चली गई,,, #सचिन राणा हीरो

लगा था दाग माथे पर, उसे आज मानो धो दिया। और हिंदुस्तान को सही में, आज़ाद करा दिया।। बोकर गए थे जो बीज, अंग्रेज हिंदुस्तान में। उस फसल को आज, उखाड़ फेंका हिन्दुतान ने। कितने बेटो के बलिदान को, आज मिला होगा सुकून हिंदुस्तान में। इसलिए तो कन्याकुमारी से कश्मीर […]

अपराधी थानेदार बने हुये है बेईमान पत्रकार बने हुये है। गुंडे बदमाश भी इन दिनों मे देश की सरकार बने हुये है। नशे मे धुत रहते है शिक्षक स्कुल बीयरबार बने हुये है। महिनो गायब रहते डाक्टर अस्पताल बेकार बने हुये है। कविता का कारोबार हो रहा कवियों के दरबार […]

विधा – मंदाक्रांता छंद ! विधान~ [{मगण भगण नगण तगण तगण+22} ( 222 211 111 221 221 22) 17 वर्ण, यति 4, 6,7 वर्णों पर, 4 चरण [दो-दो चरण समतुकांत] आस्था मेरी ,परम विकसी, प्यार उन्माद छाया! लीला छाई , नवरस भरी , व्यक्त आनंद पाया ! पीड़ा देती , […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।