Archives for काव्यभाषा - Page 107

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कुछ ख़्वाब बुन लेना

कुछ ख़्वाब बुन लेना जीना आसान हो जायेगा दिल की सुन लेना तेरा इक मक़ाम हो जायेगा मुद्दत लगती है दिलकश फ़साना बन जाने को हिम्मत रख वक़्त पे इश्क़…
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नेता नहीं देता कान……

नेता नहीं देता कान, जनता की जमी जबान महँगाई सुरसा समान, छूने लगी आसमान । घूम लिये देश सारे, किन्तु जब वतन पुकारे, छप्पन इंची सीना धारे, छह इंची मुस्कान…
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किसान …

किसान अन्नदाता पर दुर्भाग्य ऐसा की उसके हिस्से में ही अन्न नहीं आता कैसा भाग्य ,कैसी नियती ,कैसा तक़दीर का खेल अन्न दाता ही खुद अन्न के एक एक दानें…
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राजयोग जरूरी

यूपी के योगी की अजब माया कांवड़ रूप मे शोर मचवाया विशालकाय डीजे बज रहे लोगो के कलेजे कांप रहे ट्रक ट्रैक्टरों मे चल रही कांवड़ हुड़दंग करके बवाल मचावत…
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ऐसे उकेरे हैं मेरे ज़ेहन में अपने नक्शे कदम…..

ऐसे उकेरे हैं मेरे ज़ेहन में अपने नक्शे कदम।  नाम न ले गर साँस तेरा,तो मेरा घुटता है दम। यूं तो जिंदगी में अब,तेरा साया भी कहीं नही तुम यही…
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 *पर्यावरण पच्चीसी* 

1. पृथ्वी पर चहुँ ओर है,सबहि आवरण सोय। पर्यावरण कहत उसे, मीत सुनो सब  कोय।। 2. क्षितिजलपावक है गगन,बहती साफ समीर। पर्यावरण  वही  बनत, जीवन  और  शरीर।। 3. पेड़ और…
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