Archives for काव्यभाषा

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अभी रावण का पुतला जला है

अभी रावण का  पुतला  जला  है हादसा मेरे भाई कहां फिर टला है कई  रावण  फिर से  जिंदा  मिलेंगे बुराई का जहां में अभी सिलसिला है दानव ही दानव नजर…
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सन्तान

जीते जी जो सेवा करते माता पिता का हर ध्यान जो रखते उनकी हाँ में हाँ मिलाते बड़े होने पर भी आंख न मिलाते अच्छी होती वह संतान मरने के…
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*फिर से जगाने आई हूँ*

आज मेरे गाँव की सूरत दिखाने आई हूँ खोई हुई पहचान से परिचय कराने आई हूँ। साफ सुथरे गाँव में हरियाली का विस्तार था प्रेम से रहते सभी अपनत्व का…
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दशहरा

अब तो जागो हे इंसान। मत बन तू इतना अंजान। झूठ फरेबी धर्म निरर्थक, मत पालो अब ये शैतान।। भ्रम फैलाना छोड़ो "नीर" अब तुम नहीं रहे नादान।। रहें दिलों…
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सफर मेरा……

अजीबोगरीब था सफर मेरा, शुरुआत में मैंने कोई शुरुआत ही न की निकला जब घर से अनजान था मैं, रास्ते में भी किसी से मुलाकात ही न की। दिल में…
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