गरीबी और साथ में दर्द,फिर भी लोग बनते हैं हमदर्द..जी हाँ,भारत के जीवन में आज हमें जब आजादी मिले हुए सत्तर वर्ष हो गए हैं तो भी,आज गरीब लोग अंग्रेजों वाले समय जैसा जीने को मजबूर हैं। मैं बहुत-से पिछड़े इलाको की बात कर रहा हूँ, जहां लोग एक रोटी […]

कुहुक कुहुक में गीत प्यार, के गाती कोयल डाली पर। हर्षित होता मन उपवन, इठलाती कोयल डाली पर।। मदन तीर से बिंधी हुई, राग छेड़ती प्रीत मल्हार। मादक-मादक गंध महकती, पत्ता-पत्ता डाली पर।। अमराई में मोर की गंध, महक रही है डाली पर। कोयलिया फिर मचल उठी, कुहुक रही है […]

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बेटा अपने वृद्ध पिता को रात्रि भोज के लिए अच्छे रेस्टॉरेंट में लेकर गया। खाने के दौरान वृद्ध पिता ने कई बार भोजन अपने कपड़ों पर गिराया। रेस्टॉरेंट में बैठे खाना खा रहे दूसरे लोग वृद्ध को घृणा की नजरों से देख रहे थे,लेकिन वृद्ध का बेटा शांत था। खाने […]

भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है और लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मानी जाती है। लोकतंत्र के एक ऐसे स्तंभ रूप में,जिसके बिना लोकतांत्रिक व्यवस्था की कल्पना ही नहीं की जा सकती। मीडिया को यह  सम्मान यूं ही नहीं मिला है,बल्कि उसे इस सम्मान […]

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सतरंगी सपनों की दुनिया, आज लगे बेमानी.. अपने ही जब गैर बने, तो दुनिया लगे बेगानीll रस्ते चलते साथी मिलते, कितने जाने पहचाने.. वक्त पड़े इनका जब देखो, बन जाते अंजानेll हैं मतलब के यार सभी, न इनको करना याद कभी.. जो पल में साथ बनाए कहीं, पर साथी पर […]

करता हूं अनुरोध आज मैं,भारत की सरकार से, प्रतिभाओं को मत काटो,आरक्षण की तलवार सेl वर्ना रेल पटरियों पर जो,फैला आज तमाशा है, जाट आन्दोलन से फैली,चारों ओर निराशा हैl अगला कदम पंजाबी बैठेंगे,महाविकट हड़ताल पर, महाराष्ट्र में प्रबल मराठा,चढ़ जाएंगे भाल परl राजपूत भी मचल उठेंगे,भुजबल के हथियार से, […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।