ईश्वर को ढूढ़ने निकली थी मिला मुझे वो देर से खुदा भी मिल जाता मुझे पर पता चला कुछ देर से । इत्तेफाक ही था जो निश्छल मुस्कुराहट देखने मिली कहीं औऱ नहीं वह यहीं है पहचाना मगर देर से । अब तक मूरत मज़ार को उसका घर समझ रही […]

माँ एक शब्द नही है संसार बसता है उसमें, अपने खून से सींचकर हमे जीवन देती है, कितनी भी मुश्किलें क्यूँ न सहे, मगर कभी कुछ नही कहती है, कब मुझे भूख लगी कब मुझे प्यास लगती है, न जाने कैसे समझ जाती है माँ, बिना मेरे कुछ कहे सब […]

हिंसा से हिंसा ही बढ़ती सारे जग की शांति हरती बैरभाव,कटुता बढ़ती एक दूसरे से दूरी बढ़ती भाईचारा खत्म हो जाता हर कोई दुश्मन नजर आता ऐसी घड़ी मे धैर्य अपनाओ राग,द्वेष,हिंसा मिटाओ प्रेम,सदभाव की अलख जगाओ राह भटको को राह पर लाओ परमात्मा के है सब बन्दे उन्हें परमात्म […]

2

तन्हा तन्हा रहती हूँ मैं अपनी मौज में बहती हूँ मैं तुम क्या जानो खंड़हर जैसी जर्रा जर्रा ढ़हती हूँ मैं निर्मल जल हिमगिरि से लेकर कलकल कलकल बहती हूँ मैं बिन बोली कितनी हैं बातें फिर भी चुप चुप कहती हूँ मैं मैं ठहरी गंगा सी सरिता बोझ पाप […]

इंदौर | शहर में बेशुमार कला और कलाकारों बसते है, उनमें से एक ‘पीजे प्रोडक्शन भी है, जिनके द्वारा एक विडीयो एलबम ‘हीरीये’ का निर्माण किया गया जिसकी लाँचिंग 13 मई को इंदौर में होगी|    कैसे एक फीचर फिल्म की कहानी को मात्र 13 मिनट में समेटा जा सकता […]

ख़्वाब सजाते हैं आँखों के जो देखे सपने होते हैं रहते हैं उनकी पनाह में पापा तो पापा होते हैं। ख़्याब सजाते हैं आँखों के जो देखे सपने होते हैं। दिन तपते हैं रात में जलते लहू चूसकर हम पलते हैं करते हैं ज़िद पूरी हमारी गलती पर परदा करते […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।