कभी उन्होंने देखा ही नही, मुझे उस नजर से। जिसकी मैं उनसे, चाहत रखती हूँ। हूँ खूबसूरत तो क्या, जब उनकी निगाहें। मुझे पर ठहरती नहीं। तो क्या जरूरत ऐसे, रूप और यौवन का ? चंदन सा सुगन्धित मेरा वदन। उनको पास न लपता है। और न ही उनके दिलमें, […]

न दिल मेरा लग रहा, न मन मेरा लग रहा। एक अजब सी बेचैनी, मेरे दिलमें हो रही है। करु तो क्या करूँ में, दिल की बेचैनी के लिए। यदि हो कोई इलाज तो, मेरे जान तुम बता दो।। कब से तुम्हारे आने का, में कर रहा यहां इंतजार। न […]

मचल रहा है मेरा दिल, तुझे देखने के लिए। करू क्या अब में, बता दो तुम्ही कुछ। जिस से देख सकू, अपनी जानेमन को। और मचलते दिल की, तड़प को मिटा सके।। जबसे चढ़ा है तेरा प्यार, मेरे दिल दिमाग पर। कुछ भी दिखता नहीं, तेरे सिवाये अब मुझको। और […]

दिल की चाह सम्मान, पाने की कभी नहीं रही। लिखा मेरा शौक है, और हिंदी मेरी माँ हैं। इसलिए विश्व की ऊंचाइयां, मां को दिलाना चाहता हूँ। और माँभारती की सेवा करना, अपना फर्ज समझता हूँ।। इसलिए में साफ शुद्ध, बिना चापलूसी के लिखता हूँ। और माँ भारती के चरणों […]

मिली थी सत्ता मध्यप्रदेश की, कांग्रेस को 15 सालो के बाद। लूटा दी 15 महीने में , फिरसे लूटियाँ बंटाधार ने। कितना मनहुस है ये, अब कांग्रेस के लिए। चलती हुई सरकार को, डूबवा दिया बंटाधार ने। फिर से मध्यप्रदेश को, बना दिया अभागा। और मुख्यमंत्री दर्शक बनकर देखता रहा […]

फूल बन कर, मुस्कराना जिन्दगी है l मुस्करा के गम, भूलाना जिन्दगी है l मिलकर खुश होते है, लोग तो क्या हुआ l मिले बिना दोस्ती, निभाना भी जिन्दगी है।। जिंदा दिलो की, आस होती है जिंदगी। मुर्दा दिल क्या, खाक जीते है जिंदगी। मिलना बिछुड़ जाना, तो लगा रहता […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।