रेल अपनी पूर्ण रफ्तार में थी | कढाके की ठंड में पाखाने के नजदीक ठीक दरवाजे के सामने जमीन पर फटे-पुराने चीथड़ों में एक निर्धन किसान बैठा हुआ था | वह ठंड से कांप रहा था और बार-बार अपनी जेब को टटोल रहा था | वह यह प्रयास निरन्तर पिछले […]

 सिंदूरा और वैभव “लव वर्डस” के नाम से जाने जाते थे. बैकिंग के कोचिंग सेंटर में दोनो की मुलाकात हुई थी. प्रतियोगिता परीक्षा समाप्त होते ही प्यार इतना परवान चढ़ा की दोनो ने शादी कर ली.जब रीजल्ट आया तो सिंदूरा का चूनाव हो गया जबकि वैभव पीछे रह गया था.जल्दी […]

नई दिल्ली। विश्व हिन्दू परिषद ने अपनी प्रवक्ताओं की एक नई सूची जारी की है जो संगठन के विषय में मीडिया से जानकारी साझा करने तथा टेलीविजन चेनलों की बहसों में सम्मिलित हो सकेंगे। ये सभी निम्नानुसार हैं: श्री विजय शंकर तिवारी, इंदिरापुरम गाजियाबाद, उत्तर-प्रदेश मो. 98998 35132 श्री देवजी […]

सोना चांदी हीरे मोती, तो तुम पहले बेच चुके। बचा हुआ था साहित्य, जिसको अब तुम बेच रहे। सब कुछ खत्म हो जायेगा, बस थोड़ा सा इंतजार करो। वो दिन भी अब दूर नहीं, जब स्वंय को ही खोजोगे।। क्योंकि, अब तो साहित्य बिक रहा, गली मोहल्ले और चौराहो पर। […]

शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा का आओ मिलकर आव्हान करे कल्याण करे जगत का वह ऐसा हम अनुष्ठान करे नारी जाति के सम्मान से ही माँ दुर्गा प्रसन्न हो सकती है कन्या को सब देवी समझे उपकार तभी वह कर सकती है दया नही उसको अधिकार दो सम्मान से जीने का […]

जी हाँ बिहार की धरती पर चुनावी बिगुल बज चुका है सभी पार्टियों ने अपने-अपने योद्धाओंको चुनावी मैदान में झोंक रखा है। शाब्दिक बाणों की बौछार आरम्भ हो चुकी है। आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। सभी सियासी महारथियों ने अपने-अपने करतब दिखाना आरंभ कर दिया है। सब […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।