सच में रिश्ते तुम्हारे- मेरे कुछ गहरे थे या बुलबुलों की तरह पानी पर ठहरे थे शोर तो बहुत किया था मेरी हसरतों ने लेकिन शायद तुम्हारे अहसास बहरे थे कितनी कोशिश की मैं छाँव बन जाऊँ ख्वाहिशें तुम्हारे चिलचिलाते दोपहरें थे कब देखी तुमने हमारे प्यार का सूरज निगाहों […]

हम भारत के लोग हमेशा से नियम तोड़ने में विश्वास रखते है। नियम में रहे तो क्या जीवन। जीवन तो अलमस्त हो तभी मजा है। नियम तो वैसे भी गले में रस्सी जैसा होता है। साला एक सीमा में रहो इससे ज्यादा कुछ मत करो पर हम तो कुछ अलग […]

पुस्तक समीक्षा  कवि :-श्री रमेशचंद्र विनोदी जी *संक्षिप्त परिचय*बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी विनोदी जी सहज ,सरल ,गंभीर प्रवृत्ति के वह कलमकार हैं जिनको अपनी माटी ,अपनी संस्कृति ,से लगाव है।जिनको प्रेम है हर रिश्ते नाते से ।जीवन के संघर्षों ने उनको हर उस चीज में पारंगत किया है जो सामने आती गयीं।कलम […]

माता का उपदेश नहीं बच्चे को कुछ भी भाया। बारिश में नौका लेकर पानी के बीच चलाया।। बिनु पतवार कागजी नौका इधर उधर बल खाती। कभी पास में आते – आते दूर बहुत हो जाती।। लहरों के संग उठते – गिरते असमंजस हो जाता। नौका के सँग बाल हृदय भी […]

करवा चौथ मनाऊंगा , मैं गीत प्यार के गाऊंगा । मैं भी तो अपनी सजनी के , खूब लाड़ लडॉऊंगा ।। करवा चौथ मनाऊंगा …… जब जब उसको देखता हुँ , मन खुश हो जाता मेरा , जब जब उसके पास जाऊ , तो दिल बहल जाता मेरा , उसके […]

तेरे मेरे सपने, अलग हो सकते है। जिंदगी को जीने का, सलीका भी अलग हो सकता है। पर तेरे दिल में, मेरे लिए, मेरे दिल में, तेरे लिए, कुछ तो है? तभी तो, तुम मेरे दिल में, और हम, तेरे दिल मे, बसते है।। दूर होकर भी कितने पास हो […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।