16 दिसम्बर 2012 को भारत की राजधानी दिल्ली की सुनसान सड़क पर हुए 23 साल की ज्योति के साथ हुए उस हादसे का जिक्र अगर आज भी कभी होता है तो लबों पर शिकायत, दिल में दर्द, मन में डर और आँखों में अश्क होता है । वो रात भयानक, […]

पग पग पर कांटे बिछे चलना हमें पड़ेगा। कठिन इस दौर में हमको संभला पड़ेगा। दूर रहकर भी अपनो से उनके करीब पहुंचना पड़ेगा। और जीवन के लक्ष्य को हमें हासिल करना पड़ेगा।। जो चलते है कांटो पर मंजिल उन्हें मिलती है। और दुखके दिन बिताकर सुख में प्रवेश करते […]

कर लो सुध कुदरत की आज, की है हमने जिससे छेड़छाड़। करके छिद्र ओजोन परत में, क्यों रहे स्वार्थ के झंडे गाड़। अपनी धरा के सुरक्षा कवच को, हम सब मिलकर तोड़ रहे। बो कर कांटे राहों में अपनी, फूलों की बाट जोह रहे । अपने आराम कि खातिर हमने, […]

पुकारती है मां भारती ढूंढती है आजादी गली-गली ,शहर-शहर पुकारती है मां भारती बेड़ियों में धर्म की जकड़ी मां भारती सिसक रही है एकता को फिर से मां भारती ढूंढती है आजादी कर्ज से लगी हुई भुखमरी ,गरीबी से पेट भरने को तरस रही है मां भारती ढूंढती है आजादी […]

मौन साधे समय खड़ा है सवाल उससे भी बड़ा है क्या ख़ता हुई है हमसे कोरोना मौत सा तना है कोई उपाय सूझता नही राह कोई दिखती नही काम ठप्प सबका पड़ा है देश चिंतित सा खड़ा है इस चिंता से उभार दो कोरोना संकट उतार दो हम तो है […]

अंकित होंगे मेरे लहू से बर्बादी के अफसाने किसने सोचा था किसने जाना था यार दौस्तो सुना था मेहबूब बेवफा हो ये है कोई कोई हाय मेरे महबूब की आंखों में फरेब होगा हाय हाय किसने सोचा था किसने जाना था यार दोस्तों पतझड़ आयेगी आ कर चली जायेगी हाये […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।