जब जब भी धर्म की हानि होती जब जब भी धर्म की ग्लानि होती तब तब ही अंधकार छा जाता है धरा पर घोर कलियुग आ जाता है इसी कलियुग से मुक्ति दिलाने को हमें पतित से पावन बनाने को परमात्मा स्वयं धरा पर आते है हमे परिवर्तन की राह […]

तेरी यादों को अभी तक, दिल से लगाये बैठा हूँ। की तुम लौटकर आओगे। अपने के साथ नहीं तो, परायें के साथ ही सही। तो आप की धरोहर, आप को सौप देंगे। और इस मतलबी दुनियाँ से, कुछ कहे बिना निकल लेंगे।। इसलिए कहता था तुमसे की, दिलके इतने करीब […]

पाक है तू…. उस नूर ए खुदाई सी यकीं रख…ख़ुद पर काबिल है तू.. आसमाँ की ऊंचाई सी राह में रखा कोई कंकर नहीं जो आया उसने उछाला श्रद्धा है तू मीरा की भक्ति सी यकीं रख….ख़ुद पर प्रीत है तू राधा के नाम सी प्रेम किया …रूह रूह बसा […]

प्रकृति बसन्त से लबरेज हुई ठंडक भी मौसम में कम हूई सुहाना मौसम भाने लगा है सरसो का फूल लुभाने लगा है गेहूं की फ़सल की हरियाली है प्रकृति आवरण बदलने वाली है आओ खुद को भी बदल डाले व्यर्थ के विचारों को धो डालें अपने लिए भी समय निकालें […]

नींद आती नहीं, चैन पाते नहीं । फिर भी तड़पाने से, बाज आते नहीं। थोड़ा सा बदलो, अपना तुम दृष्टिकोण। कुछ तो जैनधर्म का, अनुसरण करो।। खुद जीओ औरों को, भी जीने दो। महावीर स्वामी का संदेश, जीवन में अमल करो। छोड़कर हिंसा को, अहिंसा पर चलो। और जीवन को […]

सादी सादी सी रही,जिन्दगी हमारी ना रहै रंगीनियो के निशान,अर्जी हमारी। कोरे कागज की अनूठी, मिशाल बनी रहे कोई शब्द नही वो, वेमिशाल बनी रहे।। पहचान अपनी सादगी पर , तक्कलुफ कयों है हो रंगीनियो मे डूबे हुए, फिर तकलीफ क्यों है। विलासिता की कालाबाजारी, देख रहा हूँ अपनो से […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।