सबसे करिए प्रेम जगत में अपना हो या हो पराया सब ईश्वर की सन्तान है ईश्वर का हो सब पर साया पंचतत्व से बनाई सृष्टि दिया अनूठा उपहार सबको वही पालक है इस दुनियां के अजन्मा निराकार कहते उनको जीवन मरण से परे वे रहते तभी तो वे परमात्मा कहलाते […]

बचपन की यादों को कभी भूला ही नहीं। जवानी के किस्सों को दिलमें सजाकर रखे हूँ। कितना खुश और प्रसन्न उस जमाने में रहता था। जब न कोई चिंता न कोई दयित्व था। बस मौज मस्ती का वो भी एक दौर था।। पड़ लिख कर जब नौकरी करने लगा । […]

वादा किया खुद से आज, मानूँगी ना मैं यूँ हार। कोई जाल बिछाए, या सडयंत्र रचाए। मेरे हर कदम पर, काँटे बिछाए। लक्ष्य पर मेरा, है बस निशाना। कैसे भी करके, है इसको पाना। वादा किया खुद से……… जो निराशा सताए, नजऱ कुछ ना आए। उम्मीद का कोई , हर […]

अपराधी चले अपनी चाल चुप चाप बैठे सरकार ।। दिन दहाड़े लूट हत्या बालात्कार खूब हो रहे विकास रूपी चमत्कार।। शहरों में ऊँचे ऊँचे व्रीज नोचे लगे करोना मरीज।। गांव घर में तरसते लोग माइक पर बरसते पावर के लोग।। हद हो चुकी है वेशर्मी की चैनलों की हठधर्मी की।। […]

जब मिले किसी से नजरे जब मिले किसी से दिल। समझो की प्यार तुम्हें अब होने लगा है।। जिंदगी की दास्तान चाहे कितनी हो हसीन। बिन तुम्हारे कुछ नहीं बिन तुम्हारे कुछ नहीं। एक साथ की जरूरत हर किसी को होती है। है अगर वो नर तो चाहिए एक मादा […]

शरीर को चंगा रखो। दिमाग को ठंडा रखो।। जेब को गर्म रखो। आंखो मे शर्म रखो।। जबान को नरम रखो। दिल में रहम रखो।। क्रोध पर लगाम रखो। सबसे ही प्रणाम रखो।। अपने को मस्त रखो। किसी को न त्रस्त रखो।। अपने को व्यस्त रखो। भजन में मस्त रखो।। मुख […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।