जब लाईलाज थे तब संभल गए अब ईलाज है फिर भी फ़िसल गए इसमे कोई दोष नही महामारी का दिवाला निकला है समझदारी का छूट क्या मिली बेपरवाह हो गए कोरोना को डरा खुद हव्वा हो गए न मास्क पहना,न दो गज की दूरी जिंदगी दांव पर लग गई पूरी […]

आजकल सभी जगह मुझे इंसान दिखाई नहीं देते यह पता नहीं क्यों इसके पीछे क्या हाथ है वही हवस के शिकारी लड़कियों के पीछे भागते रहते हैं जैसे इन्होंने कभी लड़कियां देखी नहीं क्यों ऐसा करते हैं इस अपने समाज में मुझे कोई बता तो दे सोचे की जवान जवान […]

कोटि कोटि नमन करते है इस बलिदानी को, जिसने फांसी पर चढ़ा थी अपनी जवानी को। 1857 का स्वतंत्रता संग्राम इसने चलाया था। अंग्रेजो को इसने ही छठी का दूध पिलाया था। मत भूलो तुम ऐसे वीर शहीदों की कहानी को, जिसने फांसी पर चढ़ा थी अपनी जवानी को। आर […]

जो हमारे अपने थे वो हमसे दूर हो गए इस मुई महामारी से हम सब मजबूर हो गए कभी सोचा न था ऐसी घड़ी भी आएगी वो अस्पताल में रहेगे हम मिलने तक से मजबूर हो गए जिनके प्यार में हमने पलक पावड़े बिछाये सदा उन्हें देखने तक को हम […]

हर रात सुलझा कर सिरहाने रखते है जिंदगी। सुबह उठते ही उलझी पड़ी मिलती है जिंदगी।। सुलझा सुलझा कर थक जाते हैं हम ये जिंदगी। थकती नहीं ये जिंदगी,सुला देती हमें ये जिंदगी।। बेवफ़ा हम नहीं,बेवफ़ा हो जाती है ये जिंदगी। भरोसा इस पर कैसे करे,बे भरोसे है ये जिंदगी।। […]

अरमान दिलों में पाला नहीं जाता अब तो खुद को सम्हाला नहीं जाता चारों ही तरफ दहशत का मंजर है हादसा हो कोई तो टाला नहीं जाता जीत और हार की किसे परवाह यारों अब तो सिक्का भी उछाला नहीं जाता थकने लगे है पांव लंबा है सफ़र बहुत पथरीली […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।