1.प्रस्तावना-         अपनी मिट्टी की महक सी होती है अपनी भाषा। हिंदी हमारी मातृभाषा है ,और लिपि देवनागरी है । बेशक हम कितने ही देशों की भाषा सीख ले, परंतु जब तक हम हिंदी ,यानी अपनी भाषा अपनी मातृभाषा को सीखकर निपुर्ण नहीं हो जाते हैं, तब […]

सोशल मीडिया पर साहित्य -लेखन साहित्यकारों के लिए एक सुनहरा मौका है। जिससे कम से कम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों के पास हमारे विचार पहुँच जाते हैं । देश ही नहीं विदेशों में भी बैठे लोग भी साहित्य का आनन्द ले रहे हैं। फेसबुक और साहित्य के ग्रुप […]

                             राष्ट्रभाषा वह होती है जिसमें समूचा देश अपने भावों को शब्दों में ढालता है और हमारे अंदर के भाव व्यक्त करने वाली हमारी मातृ भाषा है हिंदी।  हिंदी को राजभाषा का स्थान 14 सितंबर 1949 मिला […]

” हम सब की जान है हिन्दी। हिन्दुस्तान देश की पहचान है हिन्दी मस्तक पर शोभे चमकती बिन्दी बनकर हिन्दी अपनापन की एहसास पहचान है हिन्दी हिन्द देश की गौरवशाली गाथा की गान है हिन्दी। हमारे राष्ट्र की जान,प्राण राष्ट्रभाषा हिन्दी गौरवशाली शान की पहचान है।हिन्दी हम हिनदुस्तानियों की राष्ट्रभाषा […]

     वर्तमान समय में सोशल मीडिया हिंदी प्रचार प्रसार में अहम भूमिका अदा कर रहा है ।भारत में दूरदर्शन के अधिकतर चैनल हिंदी भाषा में ही प्रसारित किये जा रहे हैं, जिनमें समाचार, धारावाहिक, गायन, नृत्य प्रतियोगिताएँ, विभिन्न प्रकार के मनोरंजक खेल व अन्य सामाजिक कार्यक्रम यदि सबसे अधिक […]

तमाम विद्वानों ,लेखकों और आज की उपयोगिताओं को देखते हुये हम ये कह सकते है और मानते भी है कि सोशल मीडिया हिन्दी के पुनरुत्थान के सहायक सिध्द हुयी। हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में सोशल मीडिया का बहुत बडा योगदान है। हिन्दी आज विश्व की दूसरी बड़ी भाषा है और […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।