दीपक जलता है, रोशनी के लिए.. प्यार होता है, तड़पने के लिए। दीपक के संग, जलती है बाती.. प्यार के संग, चलती है पाती। तेल,दिया और बाती, आग की लौ से जलते हैं.. अधेरे को दूर कर रोशनी करते हैं। प्रकाश फैलाते, कभी-कभी हवा के.. झोके आ जाते हैं, रोशनी […]

मन में बसंत लिए,प्रेम की तरंग लिए, रोम-रोम देह का,श्रृंगार गीत गा रहा। हिय में छुपा हुआ था,बेसुध मन मयूर, नृत्य करने तीव्रता से,अब मचल रहा। कोयल भी गाने लगी,बाग़ महकाने लगी, आम भी वृक्ष में आने को है,ललचा रहा। उड़ रही अब धूल,खिल गए टेसू फूल, रंगों का त्यौहार,समीप […]

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मैंने खुदा को देखा है.. कभी रोटी बेलते हुए, कभी रोटी सेंकते हुए, कभी हल-बैल के साथ दौड़ते हुए। मैंने खुदा को देखा है, सिर पर थोड़ी-सी धूप लिए.. और माटी में अपनी खोई हुई, तक़दीर को खोजते हुए। मैंने खुदा को देखा है, कभी प्यासे होंठ लिए.. आँखों से […]

सौ अरमान देखे,तब जाकर एक अरमान मिला, उम्मीदों की कश्ती में बहकर वो फरमान मिला। अब क्या घबराना ऐसे इन आंधी और तुफानों से, मौत भी आ जाए तो पलटकर वो जंहान मिला। उम्मीदों का सफर फिर उन्हीं रास्तों पर ले चला, कयामत से गुजरकर तकदीर को, वो ईमान मिला। […]

नारंग साहब के घर कन्या भोज चल रहा था। छोटी-छोटी कन्याओं को प्रेमपूर्वक भोजन करवाकर उनके पैर पूजे जा रहे थे। तभी मैं भी अपनी बेटियों के साथ वहाँ पहुंची। सभी बच्चियाँ खाने मे मशगूल थी। नारंग जी की बड़ी बहू खाना परोस रही थी। मैंने श्रीमती नारंग से पूछा-आज […]

यहां चेहरे पर भी चेहरे हैं, इंसानी राज बहुत गहरे हैं। दिल में आग लब पर गुलाब, लोग न जाने कहाँ आ ठहरे हैं। हाथ मिलाते हैं गर्मजोशी से, पर दिल में नफरत के बसेरे हैं। बोलते कुछ और करते हैं कुछ, लोगों के मिज़ाज़ यहां दोहरे हैं। इंसाफ के […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।