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तिनका तिनका बिखर गई हैं, मेरी सांसें किधर गई हैं। पीछे-पीछे भागा दौड़ा, आगे-आगे जिधर गई हैं। दुनिया के मेले में ढूँढा, उधर गई या इधर गई हैं। खतरा कतरा-कतरा आया, मुस्कानें भी बिफर गई हैं। मानवता मकड़ी जाले में, सच को दीमक कुतर गई है। नोटों का बंडल जो […]

क्या आप जानते हैं हिन्दी से संबंधित अनूठी जानकारियाँ…? यहाँ पर हिन्दी से सम्बन्धित सबसे पहले साहित्यकारों, पुस्तकों, स्थानों आदि के नाम दिये गये हैं।  हिन्दी में प्रथम डी. लिट् — डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल हिन्दी में  प्रथम एमए — नलिनी मोहन सान्याल (वे बांग्लाभाषी थे।) भारत में पहली बार […]

फागुन अब मुझे नहीं रिझाता है, जबसे शब्द कोषों में.. प्यार की परिभाषा बदल गई। जबसे रंग भूल गए अपनी असलियत, जबसे तुम्हारी मुस्कान कुटिल हो गई.. जबसे प्यार के खनकते स्वर कर्कश हो गए, तबसे फागुन अब मुझे नहीं रिझाता है। जबसे रिश्तों में पैबंद लगने लगे, जबसे प्रेम […]

बासंती मधुमास प्यार को, ऐसो नशा चढ़ायो री.. फूल-फूल पर कली-कली, इतरायो मंडरायो री। धरती से अंबर तक देखो, आया मौसम प्यार का.. हर कोई अपनी राधा संग, प्रेम ही पींग बढ़ायो री.. बांसती मधुमास प्यार………..। अंखियन में अंखियाँ डालकर, नाच रहे कन्हाई रे.. सुन बंसी धुन,जाग उठी, राधा मन […]

होली में होली जले,उड़ता रंग गुलाल, होली की शुभकामना,मन का मिटे मलाल। मन का मिटे मलाल,न कोई हो घोटाला, फैला दो संदेश,न पीनी है मधुशाला। कह नीरज कविराय,खुशी घर-घर की डोली, मद्यपान को छोड़ मनाओ घर घर होली।                         […]

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गर चली जाए मेरी जान वतन पर, तो इतना-सा काम करना.. दे देना मेरी चिता को मुखाग्नि, न मेरे मातपिता को परेशान करना। जानता हूँ रोएंगें वो बहुत, इसीलिए तुम थोडा-सा उनका ध्यान करना.. गर न मानें फिर भी वो तो, भगतसिंह-चंद्रशेखर की ख्याति का बखान करना। बता देना उन्हें […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।