आओ बच्चों के बीच मिल-बांचें, कहानी-गीत सुनाकर संग नाचें। बच्चों की प्रतिभा को लाएँ आगे, अपने अनुभवों को मिल-बांटें। धरती के यह जगमगाते तारे, देश का भविष्य बने येे उजियारे। ज्ञान के सारथी बनें हम बंधु सारे, सब पढ़ें-सब बढ़ें आओ मिल-बांचें। हर जन में शिक्षा का सहयोग जागे, जनभागिता […]

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आज फिर रात से,उधार सुकून के लम्हे मांगते हैं… चलो, आज फिर मुक़द्दर सुधारते हैं। कुछ टूटे ख्वाब,कुछ बीमार-सी ये ज़िन्दगी जो है, उम्मीदों के धागे से टूटी सांसों की तार जोड़ते हैं। घुटन-सी है चुभन-सी है अक्सर, ज़िंदगी के रास्तों पर.. बैठें कहीं वीराने में, चंद सांसें उधार मांगते […]

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रंगों में रंगने मौसम के सजने, इजहारे ईश्क… ऋतु बसंत आई है..। लम्हों को जीने लहरों के बहने, इंतजारे आशिक… सुहानी बसंत आई है..। चाहतों में संवरने साँसों को महकाने, दिले दुश्मन… बहारे बसंत छाई है..। मोहब्बत में चहकने प्यार में रमने, दिले इकरार… सुगंधी ऋतु लाई है..। प्रेम बरसाने […]

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नेताओं की जिंदगी, जबसे मस्त हो गई , चीजें बहुत महंगी, जिंदगी सस्ती हो गई। कहता था जो मसीहा,लाएगा अच्छे दिन, विदेश यात्रा पूरी उसकी एक साल हो गई। खुलेआम घूमते हैं बदमाश,इस शहर में, बस्ती अब शरीफों की सुनसान हो गई। शहीद पर न बहे होंगे,नेताओं के इतने आंसू, […]

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या खुदा हम पे भी तू अपनी इनायत करदे , दर्द और ज़ुल्म की दुनिया पे तू रहमत कर दे। कैसी दुनिया है ये,बेटी जहाँ महफूज नहीं, ऐसी दुनिया में तो, अच्छा है कयामत कर दे। मैं वो हीरा हूँ जिसे आज तराशा न गया, ले ज़मीं से तू उठा,तय […]

कुछ रिश्तों के कोई नाम नहीं होते, गुमनाम भटकते, अंजाम नहीं होते। खुले आसमान में उड़ते रहने की सोच, कोई इनके,आसमानी दायरे नहीं होते। ख्यालों की धुंध में जीने की हो चाहत, पलभर की खुशियाँ, हल्की-सी राहत। हवाओं में तराशे भावनाओं के बादल, यर्थाथ के झोंके, बिखरता आत्मबल। जिन्दगी से […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।