ये माफ़ीनामा, महज इक माफ़ीनामा है.. कोई निज़ाम का सूरज नहीं, कोई हौंसले की लहलहाती फसल नहीं, और न ही आने वाले वक़्त की किस्मत है ये.. ये महज़ माफ़ीनामा है, महज माफ़ीनामा। एक काल्पनिक दुनिया में लिखा गया माफ़ीनामा , जो फ़िर वक्त मिट गया,लेकिन जिसकी सदा न मिटी, […]

यह लेख स्वतंत्र लेखन श्रेणी का लेख है। इस लेख में प्रयुक्त सामग्री, जैसे कि तथ्य, आँकड़े, विचार, चित्र आदि का, संपूर्ण उत्तरदायित्व इस लेख के लेखक / लेखकों का है, मातृभाषा.कॉम का नहीं। दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन के बहाने ही सही एक ऐसी बहस तो शुरु हुई,जिसे बहुत पहले […]

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किसने देखी है, मोनालिसा की हँसी… शायद चित्रकार ने, या तुमने या हमने.. शायद किसी ने नहीं| गाँव की पगडंडी पर, पहाड़ों और खेतों की मेढ़ पर बकरियाँ चराती थावरी की हँसी, भुला देती है मोनालिसा को| लेकिन तब वहाँ न चित्रकार होता है, न फोटोग्राफर होती है सिर्फ़ प्रकृति […]

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सदियों से उसे समृद्ध बनाने वाली,प्राण फूंकने वाली,सदैव विकास पथ पर चोली-दामन सा साथ निभाने वाली आंचलिक बोलियों को इतनी निर्ममता से उससे अलग करने का विचार भी मन मे ना लाएंँ। भारत विभिन्नताओं का देश है,यदि उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक सरसरी दृष्टि से इसका सर्वेक्षण […]

इस धरती पर मां ईश्वर का है दूसरा रूप , मां की छवि है संसार का स्वरूप। मां ही होती है हम सबकी जन्मदाता, फिर भी नासमझ इंसान उसे नहीं है समझ पाता । मां है हमारे जीवन का आधार , मां में ही बसा हमारा संसार । मां है […]

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कभी-कभी ऐसा भी हो जाता है, पंछी आशियाने से जुदा हो जाता है। वो बचपन,जब खेले थे साथ-साथ, लड़ना भी शामिल था अक्सर जिसमें… वो बचपन भी कहीं खो जाता है। ऐसा भी होता है अक्सर कि, माँ का कलेजा,माँ से जुदा हो जाता है। बेटी होती है बड़ी तो… […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।