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उलझी बातों से जीवन सुलझाती… या सुलझी बातों में जीवन उलझाती… मैं सारी या आधी, मैं मझधार या किनारा.. मैं धार की पतवार, मैं मोह या माया..। मैं विरक्ति या आसक्ति, मैं वृष्टि या छाया.. मैं सत्य या भ्रम, मैं दिगभ्रमित मदमस्त हवा..। या सुरभित मधुमासी बयार, मै श्रद्धा या […]

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इन्दौर। व्यंग्य विधा के श्रेष्ठ कवि और इन्दौर निवासी समाजसेवी प्रीतमसिंह ‘ज़ख्मी’ का रविवार रात औरंगाबाद में  अकस्मात निधन हो गया है। एक उत्कृष्ट रचनाकार का यूँ  चले जाना शहर,प्रदेश और देश के हिन्दी कवियों, कवि सम्मेलनों और हिन्दी कविता के लिए अपूरणीय क्षति है। ‘मातृभाषा’. कॉम परिवार ईश्वर से […]

जो मेरा था किसी का हो गया है, मेरा यह वहम सच्चा हो गया है। उछल कर आसमां छूने की ज़िद में, वो अपने क़द से ऊंचा हो गया है। बहारें लेके यूं आया है सावन मिरे, आंगन में रस्ता हो गया है। अज़ानों की सदाएं कह रहीं हैं, अब […]

इरादों को मजबूत बना लो, जीवन जन्नत बन जाए। पुण्य कमा लो इस दुनिया में, चरित्र उन्नत बन जाए। बुराईयों का हनन कर लो, जीवन नरक न बन पाए। जीवन की फुलवारी फिर से, स्वर्ग जन्नत बन जाए।।⁠⁠⁠⁠                         […]

वैसे तो अठारहवीं सदी से ही महिलाओं की दीन-हीन दया को लेकर कुछ सुधारवादी लोगों ने चिंता व्यक्त करना शुरु कर दी थी,पर चार लोगों की आवाजे इतने बड़े देश में कौन सुनता है,पर उन्होंने स्त्री मन के किसी कोने में यह आशा जगा दी थी कि, तुम भी इस […]

परिंदों संग हर मस्तियां छोड़ आए गांव में हम कितनी हस्तियां छोड़ आए   यूं तो इक घर की दहलीज छोड़ी थी हमने लगता है अब कई बस्तियां छोड़ आए   उलझनों की ये शब अब नहीं बिताई जाती आम की छांव तले निंदिया छोड़ आए   अब कोई दिल […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।