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हमारे रामभरोसे, होली के रंगों से इस कदर घबराते हैं जिस तरह, कोई नई-नवेली दुल्हन चौखट पार करने में पल-पल हिचकिचाती है, या नया-नया नेता आश्वासन देने में अटक-अटक जाता है। हमने भी मन में ठान ली, थोडी़ भंग छान ली.. उनके यहां जा पहुंचे, हाँथों में रंग देख.. उनके […]

नमस्कार, समझ नहीं आता कि,कैसे और कहाँ से शुरु करुं, आखिरकार आप लोगों की करस्तानियाँ ही कुछ ऐसी हैं। आप कॉलेजों के बाहर,गलियों के मुहानों तथा नुक्कड़ों पर मिलने वाली वही महान विभूतियाँ हैं,जो लड़कियों का जीना हराम कर देते हैं। यूँ ही आवारागर्दी करते-करते आप को कोई भोली-भाली लड़की […]

हर पल सोना, उलझन दुख.. आफत का रोना, छोड़ो इनसे लाभ न होना। भरते घाव कुरेद रहा था, पिन अन्दर तक छेद रहा था.. हल का भी ऐसा क्या होना, हल से रखे गुरेज रहा था। वर्तमान के, साथ चला हूं.. नहीं भूत को सिर पर ढोना, हर संकट का […]

वाह रे जमाने,तेरी हद हो गई, बीवी के आगे माँ रद्द हो गई। बड़ी मेहनत से जिसने पाला, आज वो मोहताज हो गई.. और कल की छोकरी, तेरी सरताज हो गई.. बीवी हमदर्द, माँ सरदर्द हो गई। वाह रे जमाने तेरी हद हो गई..।। पेट पर सुलाने वाली,पैरों में सो […]

टेसू खिले,कानन में, महुआ महके,वन में.. लो फिर से,फागुन आया, रंग लाया जीवन में। आम बौराया,फिर आने को, कोयल व्याकुल,है गाने को.. भ्रमर प्यासा,रस पाने को, बसंत इतराया,यौवन में। लो फिर से,फागुन आया, रंग लाया जीवन में।। महक उठे,सब बाग़, गूंज उठे,अब फ़ाग.. विरह बड़ी,है आग, अब चैन नहीं,नैनन में। […]

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जोकर, एक असाधारण व्यक्तित्व का.. साधारण-सा नाम, शायद इसीलिए आसान नहीं होता.. जोकर हो पाना, वैसे कोई चाहता भी नहीं जोकर बनना, जोकर कहलाना, क्यूंकि, हर कोई चाहता है खिलखिलाना-मुस्कुराना.. पर दूसरों पर, खुद पर हँसने और खुद पर हंसाने का माद्दा हर किसी में नहीं होता और जिसमें होता […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।