सौरभ फूलों का न कम हो, यह दुआ करो.. पवन न कभी मंद हो, यह दुआ करो। नव रश्मियाँ कलिकाएँ नई, खिलाती रहें.. कलिकाएँ नव घूँघट उघाड़, मुस्काती रहें.. भाव प्रकृति का न कम हो, यह दुआ करो। समय पर लगा दो अपने, कर्म का पहरा.. यह वक़्त है अभिमानी, […]

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मैं भी जीना चाहता हूँ… शामिल होना चाहता हूँ तुम्हारी दुनियाँ में बिलकुल वैसे ही… जैसे शामिल हुए थे तुम मेरे जीवन में एक जीवन्त आशा लिए। मेरे सूखे अधरों पर, बारिश की फुहार बनकर.. मेरी सांसों की रफ़्तार बनकर, एक खुशनुमा एहसास लेकर समाए थे तुम हमाररे अरमान बनकर। […]

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प्यार हो सम्मान हो, और दिलों में मान हो.. संस्कार दिल में रहे, रंग रुप साथ हो। रुप रंग तब खिला, आज पिया जब मिला.. दिल की ये चाहत है, यूं हाथों में हाथ हो। प्यार हो इकरार हो, न कभी तकरार हो.. मन से मन जो जुड़े, बिन बोले […]

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बोर्ड परीक्षा एक खेल है, अंकों की रेलम पेल है. पास सबको ही करना है, निरीक्षक का कहना है। न हो ज्ञान स्वर-वर्णो का, अंकों की फिर भी होली है.. उतारा है केवल प्रश्नों को, पास होना उनका जरुरी है। स्तर होगा शिक्षा का ऐसा, होगा देश का भविष्य कैसा.. […]

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हे मेरे जगत कल्याण से भरी हुई अंतरात्मा और भावी सिद्ध परमात्मा…मेरे आराध्य गुरुदेव। तुम्हें आज तक कितनी माँ ने पुकार लगाई और तुमने भी माँ की भाँति ही उन सब पर स्नेह की थपकी देकर उन्हें आत्मकल्याण की ओर सन्मुख कर दिया। कभी तुम्हें पुकार लगाई हम मनुष्यों की […]

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रहमान  संग  में  यहाँ,ईसा,  नानक, राम। वीरों  की जननी यही,भारत इसका नाम।। विश्व पटल पर छाया न्यारा। प्यारा  भारत देश हमारा।। राणा, पन्ना,भामा,मीरा। यहीं हुए रसखान,कबीरा।। चरक,हलायुध,अब्दुल,भाभा। विश्व पटल की थे यह आभा।। जन्मे गीत, ग़ज़ल,कव्वाली। भारत की छवि लगती आली।। क्रिसमस, ईद,लोहड़ी,होली। पावनता पर्वों   ने  घोली।। अलग-थलग हैं भाषा […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।