शाम को रक्कासा के पग में जब पैंजनिया सजती हैं, और दौराने रक्स वो कैसी छम छम छम सी बजती हैं। तब मयकश है नोट लुटाते,वाह वाह वाह कहकर, और वासनामय नजरों में हुस्न को सारा ही भरकर। मैंने पूछा रोज क्यूं इनके विष दंतों को सहती हो, रोज़ शाम […]

उसने कभी जीने की मिसाल नहीं देखी, जिंदगी किसी कोने से खुशहाल नहीं देखीl छुपाती रही इज्जत फटे कपड़ों की गुदड़ी में, उस लड़की ने सही-सलामत रुमाल नहीं देखीl लड़ते देखा है कुत्तों से बासी रोटी के पीछे, गहरा काला निशां है उसकी आँखों के नीचेl भूख से तिलमिलाती गुर्रा […]

बदलता वक्त हूँ, जाने मेरा अंजाम क्या होगा, सुनाई दे रहे नामों में मेरा नाम क्या होगा ? यहां बिकती सभी चीजें हैं जिनका मोल लाखों में, बना अनमोल फिरता हूँ तो मेरा दाम क्या होगा ? निकल पड़ता हूँ, नदियों में समंदर भी मिले तो क्या, अभी जो है […]

कब कहाँ किसी की भी अर्जियाँ समझती हैं, बिजलियाँ गिराना बस बिजलियाँ समझती हैं। गर पकड़ में आई तो पंख नोचे जाएंगे, बाग़ की हकीकत सब तितलियाँ समझती हैं। पहले दाने डालेगा फिर हमें फँसाएगा, चाल यह मछेरे की मछलियाँ समझती हैं। फ़्लैट कल्चर आया है जब से अपने शहरों […]

ऋषि-मुनियों की संस्कृति त्याग-तपस्या और आत्मज्ञान, आत्म साक्षात्कार सविवेक रखते सभी धर्म की टेक, यथावत् मर्यादा व्यवहार टिका उस पर सद् व्यवहार, हमारी आश्रम व्यवस्था का यही तो था आधार, ब्रह्मचर्य वानप्रस्थ सन्यास अर्थ संचय से रहते दूर, अर्थ ही अनर्थ की जड़ है मठाधिपति बने अर्थ के गढ़ है। […]

  सड़कों पर उमड़ा जनसमुदाय लाखों की तादात में नर-नारी, आस्था के अथाह सागर में डूबने को तत्पर, किसी को मारकर या मरकर, बचाने अपने भगवान को, अब भगवान को बचाने के लिए भक्तों की जरूरत पड़ने लगी है, तर्क पर अंधभक्ति भारी पड़ने लगी है। भगवान कटघरे में है, […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।