वैकुन्ठ नाथ गुप्त ‘अरविन्द’ कृष्ण में प्रीति ऐसी अचर हो गई। सूर की साधना भी प्रखर हो गई। आगरा से जो मथुरा को जाती सड़क। रुनकता की ओ माटी अमर हो गई। सूर तो सूर्य हैं ,शत नमन कीजिए। उनके पथ पै सदा अनुगमन कीजिए। कृष्ण लीला के अंधे चितेरे […]

जन-जन से भू पर अपने  मैं प्यार कर रही  हूँ । बढ़ती ही जा रही हूँ बिन फायदे के मैं तो, हारे-थके  हर-इक का  उद्धार कर रही हूँ। करते हैं लोग गन्दा, मेरी सहन तो देखो, हर कष्ट झेलकर मैं व्यापार कर रही हूँ। भू के असुर अब मेरा उपभोग […]

जीवन से नदारद—–प्यार हो गया। आदमी का तामसी व्यवहार हो गया।। जिसे भी देखो —–बस भाग रहा है। धन-दौलत ही जीवन — सार हो गया।। गायब हो गई है —-बाज़ारों की रौनक। ऑनलाईन सारा —-व्यापार हो गया।। माँ-बाप को अनाथालय में छोड़ कर। वो कहता है —घर गुलज़ार हो गया।। […]

 चलता रहा, बड़ा हो गया अपने पैरों पर, खड़ा हो गया। शहर दर शहर, घूमता रहा अनुभवों को लिए, चढ़ता रहा। दुनिया भर में, बढ़ता गया शिखर कई, चढ़ता गया। सफलताएं, चरण चूमती रहीं नाम से, आकाश पट गया। कहीं भरोसा, नहीं होता कुछ कमी-सी, लगती है। आँख के कोरों […]

  नए ड्रेस में इठलाती, वो सुन्दर नन्हीं-सी लड़कीl चौराहे पर झूमती गाती, भाग-भागकर चलती लड़कीl छोटा फ्रॉक पहनती, लड़कों के संग खेलती लड़कीl भाई-बहनों से झगड़ती, लड़ाकी चतुर सयानी लड़कीl चंचल नटनी-सी लगती, मटक-मटककर चलती लड़कीl पेड़ों से आम चुराती, बेपरवाह-सी घूमती लड़कीl दो चोटी में स्कूल जाती, नदी पहाड़ […]

भारतीय संसद इस बात का प्रमाण है कि,हमारी राजनीतिक व्यवस्था में जनता सबसे ऊपर है,जनमत सर्वोपरि है। भारत दुनिया का गुंजायमान,जीवंत और विशालतम लोकतंत्र है। यह मात्र राजनीतिक दर्शन ही नहीं है,बल्कि जीवन का एक ढंग और आगे बढ़ने के लिए लक्ष्य है। भारत का संविधान पूर्ण रूप से कार्यात्मक […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।