क्रंदन मन आँ खों के आँसू , कैसे भला छिपाऊँ मैं। रोती घाटी चीख रही है, कैसे चुप हो जाऊँ मैं।। अपने घर के गद्दारों ने, इसको घायल कर डाला। आतंकी हमलों ने इसका, खूनी आँचल कर डाला।। सत्ता की चाहत में नेता, कैसे चुप हो जाते हैं। राजनीति के […]

‘बहना’ कभी आँसूओं के संग मत बहना, हमेशा हर घड़ी संग-संग रहना। भइया है तुम्हारा सबसे प्यारा, मम्मी नहीं तो क्या हुआ,भइया की परी हो। जिम्मेदारियाँ तुम्हारी सब निभाएगा, बालों में कंघी,माथे पर बिन्दी, होंठों पर मुस्कान वापस लाएगा। मम्मी की तरह मैं हूँ अब,तू पहले खाएगी फिर मैं देखकर […]

भाईचारा,दर्द,मुहब्बत बिकता है ईमान मियाँ। दुनिया के बाज़ार में तुम भी बन जाओ सामान मियाँ।। गैरों को भी अपनाने का हुनर सीखना पड़ता है। मुश्किल बड़ा फरिश्ता बनना, बन जाओ इंसान मियाँ।। आवाज़ों के इस जंगल में भीतर का स्वर सुनना है। आँखें बंद भले हों,लेकिन रखो खोलकर कान मियाँ।। […]

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Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।