आलीशान इमारत की बुनियाद, और तारीख लिखता मेरे देश में.. अपने लहू से हर ईंट को सींचता, हर एक निरीह मजदूर मेरे देश में। तन पर जिनके एक भी कपड़ा नहीं, पेट पर बंधे हैं पत्थर भारी-भरकम.. जाने किन हालातो में है जीता-मरता, भूख से लड़ता मजदूर मेरे देश में। […]

नहीं चाहिए तुम्हारी झूठी संवेदना,खोखली हमदर्दी, और फरेबी शाब्दिक जुगाली। मत करो मजदूर दिवस की आड़ लेकर मुझे इन्सानी बिरादरी से अलग। कर्म तुम भी करते हो कर्म मैं भी करता हूँ, जिन्दगी से परेशान तुम भी, परेशान मै भी.. तो  फिर सिर्फ मेरी ही बेबसी, लाचारी और बदहाली पर […]

उलझ गए कुछ यूँ बातों के बटवारे में, ग़ुम हुए कुछ यूँ शब्दों के उजियारे में। प्रश्न बना खड़ा है जीवन पल प्रति पल, अनसुलझे प्रश्नों के अंधियारे गलियारों में। जगमग होती आकांक्षाएं चमक चाँदनी-सी, घनघोर निशाओं के गहरे अंधियारों में। खोजा करते दिन प्रतिदिन जीवन पथ पर, आशाओं के […]

खून-पसीने से जिंदगी होती रही दरबदर, कौन जाने कि कैसा होता है उनका घर।। गरीबी जहाँ मजबूरी बन जाए जीवन में, तो कहाँ जाए सुख चैन उनका बेअसर। तिनके-तिनके से झोपड़ी बनाते हैं वो, जहाँ खाली रह जाता है उनका सफर। कमाने वाला एक और खाने वाले चार, असमंजस में […]

आओ रे, कर्म की आँधियाँ चलाओ रे.. पत्थर तोड़ते,सड़क बनाते ऊँचे ऊँचे महल बनाते फिर भी रहते बेघर हम, आकाश के नीचे लेते दम। कर्म ही हमारा जीवन है, परिश्रम ही हमारा धन है।। बोझा ढोते,ठेला चलाते, फिर भी रूखा-सूखा खाते.. दर्द के आँसू पीते हैं हम, अभावों में जीते […]

अब वो गांव,गांव न रहा। वो माटी में माटी का भाव न रहा। गांव को देखा तो मेरे गांव से मुंशी प्रेमचंद का गांव छूमंतर नजर आया। अब गांव में बहुत-सा अंतर नजर आया। अब सचमुच मेरा गांव बदल गया है। गांव को भी अब शहर निगल गया है।। अब […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।