व्यथित है मेरी भारत मां,कैसे छंद प्यार के गाऊँ, कैसे मैं श्रृंगार लिखूं,कैसे तुमको आज  हंसाऊंl कलम  हुई आक्रोशित,शोणित आखर  ही लिख पाऊँ, वीर शहीदों की शहादत को,शत-शत शीश झुकाऊँll सिंदूर उजड़ गया माथे का,कंगना चूर-चूर टूटे, शहीद की विधवा के,पायल बिंदिया काजल छूटेl हृदय भी काँप गया,आँखों से खून […]

यशोमति खुश थी,पति डीएम बन गया था कि,चलो पास न सही दूर है,पर मेरे तो हैं..। भारतीय नारी की तरह सारे गम भुला चुकी थी। पति के इतने बरसों के बेरुख़ेपन के बावजूद ईष्ट का शुक्र मना रही थी। उम्मीद तो बिलकुल नहीं थी कि,उसका पति अपना लेगा,पास बुला लेगा। […]

फिजाएँ भी रोक रहीं हवाओं के जरिए। मत जा तू, सूना रह जाएगा ये शहर। आसमान भी रोया लिपट कर धरती की बाँहों में। रोक ले उसे बस, सूना रह जाएगा ये शहर। मन में हजारों संवेग, पल रहे थे मिलन के। हवा,पानी सब पीछे छोड़ आए खुदा से मिलने। […]

कुछ ख़्वाब अधूरे, पल रहे हैं पलकों में.. एक हल्की-सी छुअन तुम्हारी, हाँ… जो तुम… आंखों से छू जाते हो भर देते हैं रंग कितने.. ज़िन्दगी के कैनवास पर। जब भी बे-रंग-सी लगती है, ‘ये ज़िन्दगी’ उन रंगों से,जो तुमने मुझे दिए हैं मैं फिर एक नया ख़्वाब सजा लेती […]

नजर से नजर अब पहचान लीजिए, अरमान हदय् का अब जान लीजिए। सांस में आएगी बहार की महक, झरे सब फूल मुस्कान लीजिए। हकीकत सब सुना दी है जुबां से, छिपाया कुछ नहीं दिल छान लीजिए। यह तुम्हारे ख्यालों का सौदा है, आप चाहे रात को दिन मान लीजिए।  #रचना […]

इंतजार उनका किया बीते दिन और रात। नैना रास्ता देख कर अश्रु करें बरसात। एक हतो हरि संग गयो अब बेमन हम लोग। पल-पल छिन-छिन मर जिएं कैसे कटे वियोग। राधा ऐसी बावरी कान्हा प्रीत लगाय। वृंदावन के बीच में कान्हा-कान्हा गाय। ऊधो कान्हा से कहो क्यों बिसरायो मोय। जन्म-जन्म […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।