रूप यौवन की मलिका तुम,    जबरन आहें   भरती हो। अपने यौवन के दम पर,     इतना क्यों अकड़ती हो।। करके सोलह श्रृंगार तुम,    इतना क्यों मचलती हो।  तीखे सुंदर नैनों से,    हर पल शिकार करती हो।।                   […]

माँ की पिटारी, बहुत याद आती हैं मां की वो पिटारी.. कहने को मॉं का घर पूरा अपना था, पर मॉं का पूरा संसार उस पिटारी में बसता थाl खत्म न होने पर भी, जाने कहाँ से कैसे कभी रूमाल में लिपटे कभी कुचले हुए, कभी किसी तह किए कागज […]

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`क्या साबित करना चाहते हो आखिर… पुरूषों को, चूड़ियाँ भेंट करके…..?` कायरता, नाकारापन,या कमजोरी का प्रतीक मानते हो….? भूल गए क्या…माँ…दादी के हाथ की, वो हरी काँच की चूड़ियाँ….? जो चूल्हे की आँच में तपकर, हो जाती थी..और मजबूत। रोटी थेपकर खेत भी खोद लेते थे, वो चूड़ी भरे हाथ….। […]

साहित्य सिर्फ समाज का दर्पण ही नहीं होता,बल्कि समाज को परिष्कृत कर नई दिशा भी सुझाता है….दिखाता है…..पहला कदम बढ़ाता है और इसके लिए साहित्यकार न जाने कितनी रातें और कितने दिन कुर्बान कर मानसिक रूप से वहाँ हो आता है ….उसको जी लेता है। सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव की […]

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  तुमसे है प्रेम कितना, यह नापने के लिए कोई पैमाना नहीं.. यह बताने के लिए, कोई शब्द भी नहीं.. कोई जतन भी नहीं यह तुम्हें जतलाने के लिए क्योंकि,तुम्हारे और मेरे शब्द व उनके अर्थ तुम्हारी व मेरी भाषा एक हो चुके हैंl   अब मैं तुम्हारी चुप्पी को […]

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हे श्रमजीवी तुम चलते जाना, खनन कर निज तृष्णाओं का.. तर्पण कर मन की दुर्बलताओं का भीति तुम्हारे देव नहीं हैं क्या कर्मों पर संदेह कहीं है? तिमिर राह को भेदकर बन्धु, विजयश्री पथ पर बढ़ते जानाl हे श्रमजीवी तुम चलते जानाll है बहुत जटिल यह जीवन रण, व्यथित करे […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।