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पावन प्रकृति ने प्रातः में, पुनः जगाए प्राण, कोयल के कलरव ने छेड़ी,मधुर गीत की तान। छटा बिखेरी धरती माँ ने,आँचल अपना लहराया, दूर किया सूरज ने आकर,अंधियारा था गहराया। लाल चुनर ओढ़ा दिनकर,करता माँ का सम्मान, पावन प्रकृति ने प्रातः में……। नया सवेरा कई नई,आशाएँ लेकर आया, सच करने […]

गीत एक लिखो.. शहादत पर उनकी, नमन लिखो। छोड़ सुख को चले, सोते आकाश तले.. ऐसे वीरों पर, गीत एक लिखो.. शहादत पर उनकी, नमन लिखो। भारती के आँगन पले, हाड़ मांस गला चले.. ऐसे हीरों पर, गीत एक लिखो.. शहादत पर उनकी नमन लिखो। जलाकर इष्ट की होली, मशाल […]

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उस दिन शायद पूरा भूमंडल रोया होगा, जब धरती माँ ने अपने लालों को खोया होगा। शायद उस दिन भारत माँ ने भी आजादी से इंकार किया होगा, जब बलिदान उसने अपने तीन शेरों को किया होगा। उस दिन फिर भोले ने तांडव किया होगा, जब इनकी फांसी का दिन […]

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आजादी का स्वप्न संजोया..अपनी खुशिंयाँ भूलकर, काट बेड़ियां भारत माँ की..चला निरंतर शूल पर। राष्ट्र दुलारा,आँख का तारा,शेर..ए बब्बर सरजमीं का, भगतसिंह बलिदान हुआ था..हंस फाँसी पर झूलकर। उम्र न जिसको रोक सकी थी..बारुदों के खेलों से, दाँत शेर के जो गिनता था..मौत स्वयं अनुकूल कर। राष्ट्र प्रेम का प्रखर […]

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मैं देश नहीं रुकने दूँगा, मैं देश नहीं झुकने दूँगा। आए जीवन में गर मुश्किल, पर मैं मुश्किल नहीं टिकने दूँगा । मैं देश नहीं रुकने दूँगा, मैं देश नहीं झुकने दूँगा। इस तृण हरित रुधिर की भूमि पर, कईयों ने अपना रक्त बहाया है। हिन्दू,मुस्लिम,सिख, ईसाई, सबने ही रुधिर […]

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क्या गति कर डाली है हिन्दी की हिंदुस्तान में, क्षत-विक्षत हो हिन्दी रोती इंग्लिश के कूड़ेदान में। इंग्लिश यहाँ संभ्रांतों की अब भाषा समझी जाती है, हिन्दी हर एक सभा में अब जाने से कतराती है। पहन मातृभाषा का चोला दर-दर की ठोकर खाती है, गैरों की है क्या बिसात,अपनों […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।