कभी-कभी भ्रमण में? मिलना रहना खाना पीना घूमना बहुत अच्छा लगता है,पर न जाने क्यों लौटना बिदा होना,पलट के देखना उस पल पलकें भारी करता हैl यादों का वजन, पानी भरे नयन.. कथन-उपकथन, बिताए पल छिन लगा हुआ मन, दिन-दिन की अनुभूति-चित्रण विछोह साथ आ जाता हैl क्या कोई देश, या शहर,प्रकृति भी हमें लिप्त प्रायः करती […]

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अगर आज प्रधानमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हैं,तो वो सिर्फ अपनी आक्रामक शैली की वजह से हैंl सपनों के सौदागर नरेन्द्र मोदी ने आम चुनाव से पहले देश की जनता को बहुत सारे सपने दिखाए थे और उनसे वादा किया था कि वे उन सपनों को साकार […]

तू पथिक जिंदगी बढ़ते चल, जब आए राह में कोई पत्थर तू घिस-घिसकर ले अपने अंदर, तू पथिक जिंदगी,बढ़ते चल तू , बढ़ते चल तू,बढ़ते चल तू। तू बना धार को ऐसी रे, बने रहे निशान तेरे धरती पर तू बढ़ते चल, तू बढ़ते चल, तू पथिक जिंदगी बढ़ते चल। […]

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मैं किसान हूं , देश का सम्मान हूं। देश जाति भेदभाव से, मैं अनजान हूं।। पसीना बहाता हूं, धूप में सिकता हूं। खेत पनियता हूं, अन्न उगाता हूं.. इंसा तो इंसा, पशुओं को भी खिलाता हूं.. क्योंकि, मैं किसान हूं।। ईश जो भी देता है, मुझे बहुत होता है जो […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।